उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान में बिहार के युवाओं को 18 हस्तशिल्पों में फ्री में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें सिक्की कला का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है जहाँ युवाओं को सिक्की के घास से पेंटिंग बनाना सिखाया जा रहा है। सिक्की से पेंटिंग बनाना बहुत ही मुश्किल है, मगर इस मुश्किल काम को सहज रूप से बिहार के युवाओं द्वारा किया जा रहा है। बाजार में सिक्की पेंटिंग की बहुत मांग रहती है क्योंकि यह देखने में काफी खूबसूरत और आकर्षक होता है।
राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित प्रशिक्षक दे रहे हैं प्रशिक्षण
सिक्की पेंटिंग देखने में काफी खूबसूरत और आकर्षक लगती है। उपेन्द्र महारथी संस्थान में धीरेन्द्र कुमार प्रशिक्षक के रूप में सिक्की कला का प्रशिक्षण दे रहे हैं। धीरेन्द्र कुमार को इस कला में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वह बताते हैं कि सिक्की से आमतौर पर डलिया, गुलदस्ता, टोकरी, प्लेट, आदि कलाकृतियाँ बनाई जाती हैं। इस बार उपेन्द्र महारथी संस्थान में उनकी कोशिश है कि इस कला को सीख रहे प्रशिक्षुओं को सिक्की की घास से पेंटिंग बनाना सिखाएं।
ऐसे बनती है सिक्की पेंटिंग
धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि सिक्की पेंटिंग बनाना काफी मुश्किल काम है और इसमें काफी समय भी लगता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पेंटिंग बनाने के लिए सबसे पहले एक तस्वीर को अपने मन में सोचना होता है उसके बाद तस्वीर के अनुसार सिक्की के घास को छोटे-छोटे टुकड़ों में किया जाता है। इसके बाद काटे गए टुकड़ों को एक-एक करके सही तरीके से तस्वीर के अनुरूप कागज पर चिपकाया जाता है ताकि तस्वीर को रूप मिल सके। इन सब प्रक्रिया के दौरान बहुत ही पैनी नजर और ध्यान रखना होता है।

देखने में काफी खूबसूरत और आकर्षक होती है पेंटिंग
युवाओं को भा रही है सिक्की कला
सिक्की कला को सीख रहे युवा बताते हैं कि यह कला बहुत ही मजेदार और योग्य है। वह इस कला के बारे में बहुत ही कम जानते थे। जब वह कभी किसी मेले में जाते तो वहाँ सिक्की से बने उत्पादों को देखते थे और सोचते थे कि ये उत्पाद कैसे बनाए जाते होंगें? उपेन्द्र महारथी संस्थान में इस बार सिक्की कला में प्रशिक्षण करने का मौका मिला है। इस कला में सिक्की के उत्पाद को बनाना तो सिख ही रहे हैं साथ ही सिक्की के घास से पेंटिंग बनाना भी सिख रहे हैं जो काफी रोचक है।



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