शाहपुर पंचायत क्षेत्र अंतर्गत शाहबाजपुर गांव में चारों शवों के अंतिम संस्कार के लिए भी तंगी दिखी। मृतका के चचेरे ससुर राम प्रसाद रजक माेबाइल पर अंतिम संस्कर काे लेकर किसी से बात कर रहे हैं। बातचीत के दाैरान एक गाेईठा का दाम 9 रुपए बताया जा रहा है। 250 गाेईठा में चार लाश नहीं जलने की स्थिति में चार साै गाेईठा की व्यवस्था करने की सहमति बनती है।
पति का पैर टूटा रहने की स्थिति में भीम रजक के पिता अशाेक रजक ने मुखाग्नि दी। मृत रीमा देवी और उसकी पुत्रियां रिया, राधिका व कृता का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। भीम रजक की मां सीता रजक का कहना है कि एक ही कार्ड पर अनाज का उठाव हाेता है। अनाज उठा कर लाते हैं, तीन हिस्से में उसका बंटवारा कर दिया जाता है। चार बेटा में भीम व भाेला काे देकर एक हिस्सा हम अपने दाेनाें कुंवारे बेटे बासू व सुभाष के लिए रखते हैं।
60 प्रतिशत युवा पीढ़ी है स्मैक की गिरफ्त में
शहर से महज तीन किलाेमीटर की दूरी पर कपरपुरा रेलवे स्टेशन से सटे सहबाजपुर के ग्रामीणाें का कहना है कि पिछले कुछ साल से स्मैक की लत बहुत तेजी से इस गांव में फैली है। सहबाजपुर के ग्रामीणाें ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि बहुत तेजी से शहर की तरह यहां भी स्मैक पीने का चलन बढ़ा है।



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