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सीतामढ़ी में बाघ अधिकारीयों के साथ कर रहा आंख मिचौली:जाल बिछाकर बाघ का इंतजार करती रही टीम

बाघ 5 जनवरी को पहली बार रीगा के रमनगरा में दिखा था। लेकिन उसके बाद आज 14 दिन हो गए, बावजूद बाघ नही दिखा और बाघ अपना ठिकाना लगातार बदल रहा है। बुधवार के सुबह भी उसके नए पगमार्ग मिले हैं। पगमार्क के आधार पर टीम बाघ को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है। लेकिन बार-बार ठिकाना बदलने से टीम की रणणीति फेल हो जा रही है। बाघ के नया पगमर्ग खरका के पूर्वी सरेह स्थित चिमनी से पांच सौ मीटर की दूरी पर मिले हैं। इससे आशंका है कि बाघ ने फिर से अपना रास्ता बदल लिया है। फिलहाल बाघ कहां है यह कहना मुश्किल है। हालांकि फॉरेस्ट विभाग की टीम को अंदेशा है कि बाघ परोड़ी के सरेह स्थित झाड़ियों से निकलकर खरका के पूर्वी सरेह में पहुंच चुका है।

बाघ के इंतजार में बैठी रही टीम, बाघ ने ठिकाना बदला

एक तरफ जहां फॉरेस्ट विभाग की टीम बाघ को पकड़ने के लिए जाल बिछाकर बैठे थे । दूसरी तरफ बाघ टीम को चकमा देकर अपना ठिकाना बदल लिया। माना जा रहा है की जबतक रात को टीम बाघ को पकड़ने की कोशिश नही करती तब तक उसे पकड़ना मुश्किल है। इसके लिए मास्क लाइट होना बेहद जरूरी है,जो टीम के पास उपलब्ध नहीं है। बता दें कि सुबह कुछ किसान जब खेतों में खाद छींटने आए तो उन्हें बाघ के पगमार्क दिखा। जांच के बाद फॉरेस्ट विभाग ने इसे ताजा पगमार्क बताया।

सड़क पर किया गया बैरिकेटिंग

परोड़ी के सरेह से लौटने की तरफ यह पगमार्क इशारा कर रहा है। उसके बाद ट्रैकर टीम पूरे सरेह में पगमार्क की तलाश में जुट हुए है। हालांकि, टीम को कोई बड़ी सफलता अभी तक नहीं मिली। टीम का कहना है कि गीले खेत में तो पगमार्क बन जा रहे हैं लेकिन ठोस मिट्टी पर पगमार्क नहीं मिलने से परेशानी होती है। खरका व परोड़ी के बीच के सरेह में आने वाले मार्ग को सुरक्षा के मद्देनजर इसको बंद कर दिया गया है। बैरेकेडिंग कर आम लोगों के प्रवेश को रोक दिया गया है। टीम ने यह कार्रवाई लगातार बाघ के स्थान बदलने को लेकर की है।

क्या कहते है अधिकारी

इस संबंध में फॉरेस्ट विभाग के रेंजर एसके सोरेन ने बताया कि बाघ लगातार ठिकाना बदल रहा है। सोमवार को हमलोग बाघ के काफी करीब पहुंच चुके थे। घेराबंदी भी की थी, पिंजरा लगाकर शिकार डाला लेकिन हमलोग उसमें सफल नहीं हो सके। बाघ के ताजा पगमार्क से पता चल रहा है कि फिर से उसने अपना ठिकाना बदल लिया है।

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