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पटना में मरीज के दिल से निकला दांत:खाने के साथ निगल गया था, हुक से आंत फाड़कर हार्ट में फंसा

पटना में डॉक्टरों की टीम ने एक युवक के दिल से दांत निकाला है। दांत नकली था और डेंचर के सहारे मुंह में फिट किया गया था। मरीज खाने के साथ दांत का पूरा सेट निगल गया।

इस सेट में लगे हुक से आंत फट गई और दांत का पूरा सेट फेफड़े और दिल के बीच हार्ट से निकलने वाली मेन नस में फंस गया। हुक के कारण दांत को गले से निकालना जानलेवा था और छाती की ओपन सर्जरी से भी जोखिम था।

डॉक्टरों की टीम ने गर्दन में चीरा लगाया और हार्ट की मुख्य नस से दांत सहित हुक वाले डेंचर को निकालकर मरीज को नया जीवन दिया। ये ऑपरेशन 4 घंटे तक चला। डॉक्टर इसे दुर्लभ और बिहार की पहली सर्जरी बता रहे हैं।

बेगूसराय के निजी क्लीनिक के इनकार के बाद मरीज पटना के पारस HMRI हॉस्पिटल में आया था।

बेगूसराय के निजी क्लीनिक के इनकार के बाद मरीज पटना के पारस HMRI हॉस्पिटल में आया था।

बेगूसराय में डॉक्टरों ने खड़े किए हाथ

पटना के पारस HMRI हॉस्पिटल के जनरल सर्जरी के निदेशक डॉक्टर ए ए हई के मुताबिक बेगूसराय के रहने वाले 45 साल के सुरेंद्र कुमार के ऊपरी जबड़े में नकली दांत लगा था। डेंचर के सहारे लगे दांत के सेट को मरीज गलती से निगल गया।

डेंचर खाने की नली में फंस गया। इसके बाद मरीज को असहनीय पीड़ा होने लगी। मरीज बेगूसराय में ही एक निजी क्लीनिक में इलाज के लिए गया।

डॉक्टरों ने इंडोस्कोपी की मदद से डेंचर को निकालने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाए। जब जान मुश्किल में पड़ गई तो बेगूसराय के डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। इमरजेसी में मरीज को पटना के पारस HMRI हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

खाने की नली 10 सेंटीमीटर फट गई थी

सर्जरी करने वाली टीम में शामिल डॉक्टरों ने बताया कि मरीज को गंभीर हालत में लाया गया था। बेगूसराय में इलाज और पटना लाने में एक सप्ताह का समय बीत गया। डॉक्टरों ने जब एंडोस्कोपी और सीटी स्कैन किया गया तो वह दंग रह गए।

दांत के डेंचर में लगे हुक से खाने की नली 10 सेंटीमीटर फट गई, डेंचर खाने की नली से निकलकर छाती में प्रवेश कर गया था। वह फेफड़े और दिल के बीच मेन नस जो हार्ट से निकलती है, उसमें फंस गया था।

इस कारण से मरीज के बांयी तरफ छाती में पूरा मवाद भर गया था। इंफेक्शन के कारण मरीज की हालत बेहद नाजुक हो गई थी।

डॉक्टरों को इस जटिल सर्जरी में 4 घंटे से अधिक का समय लगा। - प्रतीकात्मक फोटो

डॉक्टरों को इस जटिल सर्जरी में 4 घंटे से अधिक का समय लगा। – प्रतीकात्मक फोटो

डेंचर में लगा मेटल हुक बन गया जानलेवा

मरीज की छाती में बाएं तरफ की स्थिति देख डॉक्टर भी परेशान हो गए थे। दांत वाले डेंचर में लगे मेटल के हुक के कारण इसे बाहर निकालना बड़ी चुनौती थी। डेंचर का मेटालिक हुक निकालने में अगल-बगल की भी नस को नुकसान होने का बड़ा खतरा था।

इस जटिल सर्जरी ने लिए एक टीम बनाई गई जिसे डॉक्टर ए ए हई (डायरेक्टर- जनरल सर्जरी) ने लीड किया। इसमें डॉक्टर मुहामिद हई (जनरल एंव लैप्रोस्कोपिक सर्जन) डॉक्टर नितिन कुमार ( एडवांस लैप्रोस्कोपिक गैस्ट्रोसर्जन) डॉक्टर अरविन्द गोयल (डायरेक्टर सी टी वी एस) डॉ श्रीनारायण, डॉक्टर प्रशांत कुमार, डॉक्टर प्रकाश सिन्हा और डॉक्टर आकांक्षा वाजपेई (सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट) को शामिल किया गया। मंथन के बाद डॉक्टरों की टीम सर्जरी का पूरा मैप तैयार किया।

बाएं तरफ गर्दन की सर्जरी कर हार्ट तक पहुंचे

सर्जरी करने वाली टीम के मुताबिक पहले थोरैकोस्कोपी विधि से छाती में जमे पस को निकालकर उसे साफ किया। इसके बाद बायी तरफ से मरीज की गर्दन खोलकर अंदर पहुंचा गया और वहां से उस डेंचर को सुरक्षित बाहर निकाला।

डॉक्टरों का कहना है कि गौर करने वाली बात यह है कि इस प्रक्रिया में छाती में चीरा लगाना बड़ा खतरा था। ऐसा करने से मरीज को और ज्यादा मुश्किल हो सकती थी।

सर्जरी में 4 घंटे से अधिक समय लगा। लगभग 4 इंच के डेंचर में हुक के कारण उसे निकालना काफी जटिल था। ऑपरेशन के बाद मरीज सुरेंद्र कुमार अब पूरी तरह से ठीक हैं। सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ एए हई का कहना है कि संसाधन के कारण मरीज की जान बचा ली गई, नहीं तो हालत काफी नाजुक हो गई थी।

छोटा डेंचर लगा है तो हो जाएं सावधान

डॉक्टरों का कहना है कि अगर मुंह में नकली दांत के लिए छोटा डेंचर लगा है तो सावधान हो जाएं। इससे बड़ा खतरा हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे छोटे डेंचर को लगाने में भी दंत चिकित्सकों को परहेज करना चाहिए, क्योंकि इसके खाने के साथ या फिर सोते समय आंत में जाने का डर बना रहता है।

पटना के प्रमुख दंत रोग विशेषज्ञ डॉ आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि लूज डेंचर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। रात में सोने से पहले मुंह से निकाल कर डेंचर को हर हाल में बाहर रख देना चाहिए।

डॉक्टर आशुतोष के मुताबिक डेंचर को मुंह में निकालने और लगाने वाले दांत के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे फंसाने के लिए मेटल का हुक लगाया जाता है, जो गलती से आंत में पहुंचने के बाद जानलेवा हो जाता है। ऐसा केस रेयर होता है, यह अपने आप में काफी जटिल और चौंकाने वाला मामला है।

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