भारत-पाकिस्तान की जब बात होती है तो दोनों देशों के बीच कड़वाहट भरे रिश्ते ही जेहन में आते हैं। लेकिन, कटासराज मंदिर की यात्रा के दौरान भारत से पाकिस्तान गए श्रद्धालुओं के स्वागत-सत्कार से लगा कि दूसरे मुल्क में नहीं, बल्कि पड़ोस में हैं। ऐसा ही सुखद अहसास पाकिस्तान से लेकर मुजफ्फरपुर के कांटी के चार श्रद्धालु लौटे हैं।
धार्मिक यात्रा से लौटे कैलाशी राजेश कुमार बताते हैं कि कटासराज महादेव के दर्शन के लिए जैसे पाकिस्तान की धरती पर पहुंचे, वहां महादेव की जय-जयकार व पुष्प वर्षा से जाेरदार स्वागत किया गया। अमरकुंड से जलबाेझी कर महादेव काे अर्पित करने तक रास्ते भर महादेव के जयघाेष व मंत्रोच्चारण गूंजता रहा। ऐसा महसूस हाे रहा था कि अपने देश की धरती पर तीर्थ कर रहे हैं।
अगले वर्ष वहां राम-हनुमान की मूर्ति स्थापना करेंगे
कांटी के पंच कैलाशी अनिल कुमार, कैलाशी राजेश कुमार, आनंद किशाेर व राहुल कुमार कटासराज से लौटे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष कटास राज मंदिर पहुंचे ताे वहां महादेव के समीप नंदी नहीं रहने पर नंदी की स्थापना की। इस बार महादेव मंदिर के ऊपर ध्वज लगाया। वहां राम व हनुमान की प्राचीन मंदिर है, जिसमें मूर्तियां नहीं हैं। अगले वर्ष वहां मंदिर में मूर्ति की स्थापना की जाएगी।
पाकिस्तानी आर्मी की चाक-चाैबंद सुरक्षा में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
कैलाशी राजेश ने बताया कि 20-25 दिसंबर की यात्रा के दौरान पहले दिन पाकिस्तान एंबेसी पहुंचे। इसके बाद चाक-चाैबंद पाकिस्तानी आर्मी की सुरक्षा में सबसे पहले लाहाैर स्थित डेरा साहब गुरुद्वारा लाया गया। रात्रि विश्राम के बाद सुबह से शुरू हुई कटासराज महादेव दर्शन के लिए यात्रा। महादेव काे चढ़ाने के लिए अमर कुंड से श्रद्धालुओं ने जलबाेझी की। पूजन व दर्शन के बाद सभी श्रद्धालुओं के स्वागत में पाकिस्तान सरकार की ओर से स्वागत समाराेह का आयाेजन किया गया।



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