बिहार में जाति आधारित गणना की आज शुरुआत हो गई। पटना में जिलाधिकारी चंद्रशेखर ने बैंक कॉलोनी से इसकी शुरुआत कराई। पटना का पहला घर बना इमारत रिजवी अपार्टमेंट। इसकी दीवार पर 01 का निशान गणना कर्मी ने लगाया। गणना की शुरुआत कराने पहुंचे पटना जिलाधिकारी चंद्रशेखर ने बताया कि हर गणना ब्लॉक में औसतन डेढ़ सौ घर रखे गए हैं। इसमें 700 की जनसंख्या है। छोटी इकाई बनाकर गणना का कार्य किया जा रहा है ताकि गलतियां कम से कम रहें।
चंद्रशेखर ने बताया कि दूसरा चरण अप्रैल माह में होना है। अभी गणना की डाटा एंट्री की जाएगी। जो एप बन रहा है उसमें पहले से डाटा एंट्री रहेगी। परिवार के मुखिया का नाम इसमें रहेगा। मकान का नंबर कितना है ये सब चीजें रहेंगी। उसी ऐप से गणना कर्मी आगे की गणना करेंगे। जो बाहर रह रहे हैं या जिनके घर नहीं हैं उनकी गणना का भी इंतजाम किया गया है। इसको सेकंड फेज में करेंगे।

हमें गणना कार्य में मदद करनी चाहिए- डॉ. कलाम अंजुम
भास्कर ने पटना के उस पहले नागरिक से बात की जिनके यहां से गणना की शुरुआत की गई। इमारत रिजवी अपार्टमेंट में रहनेवाले डॉ. कलाम अंजुम ने बताया कि सरकार जाति के आधार पर आंकड़े का संग्रह करना चाहती है। इससे विभिन्न तरह की पॉलिसी बनाने में सहायता होगी। सरकार इस डाटा के जरिए बेहतर पॉलिसी बनाएगी। हमसभी का कर्तव्य बनता है कि हम सरकार के इस कार्य में गणना कर्मियों की मदद करें।
दो सप्ताह में डेढ़ सौ मकानों को चिन्हित करना है
गणना कार्य में लगी शिक्षिका शहनाज बानो से भास्कर ने बात की। इन्हें सरकार की ओर से एक बैग में पूरा किट दिया गया है जिसमें फॉर्म के साथ ही मार्कर, पेन, पेंसिल, बोर्ड आदि दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि शिद्दत और लगन से यह काम हम लोगों को पूरा करना है। काम मुश्किल है लेकिन करेंगे जरूर। गणना प्रपत्र में जिला का नाम लिखना है, ब्लॉक का नाम भरना है और वार्ड संख्या भरनी है। साथ ही घर के मुखिया का नाम लिखना है। जो कोड मिला है वह लिखना है। इसकी शुरुआत जीरो वन से हम लोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2 सप्ताह में डेढ़ सौ मकान को चिन्हित करना है। 21 तारीख का समय हम लोगों को प्रथम चरण में किया गया है।
शिक्षिका का दर्द छलका
भास्कर ने पटना में गणना कार्य में लगी शिक्षिका से बात की। उन्होंने बताया कि हमलोगों से कहा गया है कि बच्चों को स्कूल में पूरे समय पढ़ाना भी है और उसके बाद जाति आधारित गणना भी करनी है। यानी सुबह साढ़े 9 बजे से 4 बजे तक बच्चों को पढ़ाना है और उसके बाद गणना कार्य करना है। यह बहुत मुश्किल काम है। बेहतर हो कि हम लोगों को किसी एक काम में लगाया जाए ताकि हम लोग काफी लगन से इसे कर सकें। सरकार को चाहिए कि हम लोगों को एक काम में लगाए।
कांग्रेस, माले और शिक्षक संघ शिक्षकों को गणना कार्य में लगाने का विरोध कर चुके हैं
गणना कार्य में लगी शिक्षिका का दर्द भी इस दरम्यान दिखा। बता दें कि महागठबंधन की पार्टियां कांग्रेस और माले ने शिक्षकों को जाति गणना में लगाने का विरोध किया है। बिहार टीईटी-एसटीईटी नियोजित शिक्षक अभ्यर्थी संघ गोपगुट के प्रदेश अध्यक्ष मार्कण्डेय पाठक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर को पत्र लिखकर शिक्षकों को जाति गणना के समय स्कूलों में पढ़ाने से मुक्त करने की मांग की है। हालांकि अभी ठंड की वजह से बच्चों के स्कूल में छुट्टियां हैं पर शिक्षकों को स्कूल आना है।
जाति गणना की राजनीति
देश मेंं जाति जनगणना कराने का अधिकार केन्द्र सरकार को है। लेकिन देश में कर्नाटक राज्य सरकार के बाद बिहार सरकार इसे करा रही है। बिहार सरकार ने इसका नाम रखा है- जाति आधारित गणना। जब नरेन्द्र मोदी सरकार बिहार में जाति गनगणना को तैयार नहीं हुई तब बिहार सरकार जाति आधारित गणना करा रही है। राजद, जदयू, कांग्रेस, माले आदि पार्टियों इसके समर्थन में हैं। तेजस्वी यादव का कहना है कि राज्य में कौन गरीब कौन अमीर है, किस समाज की स्थिति दयनीय कैसी है यह सरकार को मालूम होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भाजपा दलित विरोधी, पिछड़ा विरोधी हैं। गणना से कई तरह की योजनाएं शुरू होंंगी। आरक्षण पर भी इसका असर पड़ेगा।
चुनाव पर असर पड़ना तय
बिहार में 2024 में लोक सभा का चुनाव होना है और 2025 में विधान सभा का। तय है जाति आधारित गणना के आधार पर जो नई योजनाएं नीतीश-तेजस्वी सरकार बनाएगी या आरक्षण का दायरा बढ़ाएगी तो उसका असर दोनों चुनावों पर पड़ना तय है।



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