राजधानी पटना के गांधी मैदान लगे शिल्प बाजार में बांस के कांचियों से बने समानों की खूब बिक्री हो रही है। इसको नवादा के रजौली स्थित चित्त कोलिया गांव की महिला कारीगरों द्वारा बनाया गया है। जहां आज के दौर में प्लास्टिक और फाइबर से बने समानों का उपयोग किया जाता है। वहीं, गांधी मैदान के मेले में बांस से बनी चीजें लोगो को खूब भा रही है। मेले में आने जाने वाले लोग इन सामानों की तरफ खूब आकर्षित हो रहे हैं।
मेले में महिला कारीगर अनीता देवी और फुलवा देवी ने, अपने हाथों से इन चीजों को बनाकर पटना के शिल्प बाजार आई हैं। महिला अनीता देवी कहती है कि वे लोग काफी सालों से ये कारीगरी करती आ रही है। इन्हीं कारीगरी से उनका भरण पोषण चलता है। अनिता देवी कहती है कि हमलोग गरीब लोग है। हमे अपने समान को बेचने के लिए शहर आने का मौका नहीं मिल पाता था। जिसकी वजह से वो इन सामानों को गांव में ही बेचती हैं।

पहली बार उन्हें शिल्प बाजार में आने का मौका मिला है। उन्होंने बताया कि उनके जैसी महिलाओं के मदद के लिए काम कर रही संस्था हैंड इन हैंड के सहयोग से इन लोगों को पटना शिल्प बाजार में बांस से बनी चीजों को बेचने का मौका मिला है।

अनिता देवी कहती हैं कि हमलोग बांस से बने लैंप, पानी पीने का ग्लास, बोतल और बॉक्स के साथ–साथ कई समान है। जो इन सामानों को बनाने के लिए ये महिलाएं झारखंड से बांस लाती हैं और एक बांस की कीमत उन्हें 250 से 300 रुपए पड़ती है। उन्होंने बताया कि एक बांस से वो 2–3 समान बना पाती हैं।



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