मोतिहारी के रामगढ़वा चिमनी ब्लास्ट कांड में गंभीर रूप से घायल हुए मुक्त मिस्त्री अनिल कुमार सरोज का इलाज के दौरान सदर अस्पताल में हो गई हैं। वही चिमनी का मालिक सह पाटनर नुरुल हक की पटना में मौत हो गई। चिमनी हादसे में मरने वालो की संख्या अब 9 हो गई हैं।n
मिलता बेहतर इलाज तो बच जाती जान
अनील के परिजनों का कहना है कि अगर सदर अस्पताल में बेहतर इलाज मिलता तो शायद उसकी जान बच जाती, अनील कब सदर अस्पताल में भर्ती हुआ यह बता किसी को नहीं पता था, जब उसकी मौत हो गई तो इस बात की जानकारी अन्य लोगो को लगी, अब सवाल उठता है कि चिमनी हादसे में जब सभी घायल को रक्सौल के एसआरपी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जिसकी स्थिति नाजुक थी, उसे पटना रेफर किया गया, तो अनिल को सदर अस्पताल क्यों छोड़ दिया गया।
मरने से पहले क्या बताया
यूपी के प्रतापगंज थाना कुंडा निवासी अनिल ने मौत से पहले बताया कि काफी दिनों से चिमनी में आग लगाने का काम करता आ रहा हूं, लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ, मैं और मेरा भांजा अमरेश कुमार सरोज ने चिमनी में मशाल से आग लगाया करते थे। आग लगाने के तकरीबन पांच मिनट बाद ही चिमनी में ब्लास्ट हो गया। ब्लास्ट की आवाज सुन भागा और बेहोश हो गया, शनिवार की सुबह आंख खुली तो खुद को सदर अस्पताल के बेड पर पाया।
क्या कहते हैं सदर अस्पताल के डीएस
अनील के साथ नौ लोग आए थे, इन लोगों काे ठेकेदार भोला ने लाया था, मेहताना 16 हजार रुपए प्रति माह पर आया था, अनील सहित चार लोगो की मौत हो गई, दो लोग सब्जी लेने चल गए थे, तीन घायल है। दो का एसआरपी में इलाज चल रहा है जबकि एक पटना में जिंदगी मौत से जूझ रहा है। सदर अस्पताल के डीएस ने बताया की अनिल का इलाज बेहतर तरीका से किया जा रहा था, आग का लैंप लगने के कारण उसे कुछ दिख नहीं रहा था, सर में उसे गंभीर रूप से चोट आई थी, आग से वह झुलस गया था



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