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रजत घोष ने टेराकोटा में लोकनायकों को समाने लाया:बिहार म्यूजियम में आज भर ही रहेगी उनकी टेराकोटा प्रदर्शनी

पटना के आर्टिस्ट रजत घोष ने टेराकोटा में काफी उम्दा काम किया है। उन्होंने इसे बिहार की लोकगाथाओं से जोड़ा है। इसके लिए रजत दा मगध, मिथिला,अंगिका आदि क्षेत्रों में गए, वहां की लोकगाथाओं का अध्ययन किया और उसे टेराकोटा में सामने लाया। ऐसी टेराकोटा की प्रदर्शनी पटना बेली रोड स्थित बिहार म्यूजियम में लगी हुई है। यह प्रदर्शनी रविवार तक ही रहेगी। आपकी रुचि कला में है तो आप बिहार म्यूजियम में रजत घोष की टेराकोटा प्रदर्शनी के साथ ही छापा कला के बड़े कलाकार पद्मश्री श्याम शर्मा की पेटिंग प्रदर्शनी को भी यहां देख सकते हैं।

आप महसूस करेंगे कि एक बड़े कलाकार की कला-यात्रा कैसे ऊंचाई तक जाती है

रजत घोष की इस प्रदर्शनी को आप देखें तो इसमें आपको उनके छात्र जीवन से लेकर अब तक की विकास यात्रा के दर्शन होंगे। एक बड़े कलाकार की कला-यात्रा कैसे परवान चढ़ती है वह आप यहां महसूस कर सकते हैं। यहां आप यह भी जान -समझ पाएंगे कि रजत घोष किस मायने में टेराकोटा के बाकी आर्टिस्टों से अलग पहचान बनाते हैं। बिहार के आंचलिक लोकनायक यहां जीवंत होते हुए आपको दिखेंगे। बिहार की लोकगाथाएं आपने पढ़ीं हैं तो उसके नायक कागज के पन्नों या लोक गायन से बाहर आते हुए आपको दिखेंगे। बिषहरी देवी, जट जटिन, हिरनी- बिरनी, हिरिया- झिरिया से जुड़ी मूर्तियां यहां दिख रही हैं।

मध्यकालीन भारत के नायक भी यहां हैं

लोकगाथा के नायकों के साथ-साथ यहां राम-सीता दरबार भी दिखता है। इसी के साथ लक्ष्मी, काली, कुबेर आदि देवताओं की टेराकोटा मूर्तियां भी यहां हैं। रजत घोष की कला यात्रा बिहार के लोकगाथा के कलाकारों या हिंदू देवी-देवताओं से आगे की यात्रा है। रजत दा ने बहादुरशाह जफर, वाजिद अली शाह, मुमताज, अनारकली, मिर्जा गालिब, दौलतशाह जैसी मध्यकालीन भारत ही हस्तियों को भी टेराकोटा में जगह दी है। इस मायने में वे समग्र भारत को अपने अंदर समेटते हुए दिखते हैं। यहां रजत घोष की कुछ ड्राइंग भी आप देख सकते हैं।

मैंने इन इलाकों का पहले सर्वे किया और फिर लोक कला को प्रजेंट किया

रजत घोष कहते हैं कि तीन फेज में मैंने अपना काम यहां रखा है। मेरे पिता जी अच्छे फोटोग्राफर थे। अभी भी मेरे खानदान में लोग इसमें हैं। मैंने टेराकोटा को लेकर काम किया है। मैंने पूरे बिहार का सर्वे किया। भोजपुर, मगही, मिथिलांचल,अंगिका, वज्जिका के इलाकों में घूम कर लोक कला को अपने तरह से प्रजेंट किया है। मैं बिहार में म्जूजियम में अपना सभी काम नहीं ला पाया हूं। लेकिन फिर भी काफी कुछ आप यहां देख सकते हैं।

बिहार म्यूजियम के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा कहते हैं कि बाजारवाद के युग में पुरातन मान्यताओं, लोक देवी देवताओं और लोक नायकों को नई पीढ़ी भूलती जा रही है। वैसे लोक नायकों- देवी देवताओं से आम जन को अवगत कराने का सराहनीय प्रयास रजत घोष ने किया है। वे देश के ऐसे दूसरे टेराकोटा कलाकार हैं जिन्हें भारत सरकार ललित कला अकादमी से राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ था।

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