बीबी कॉलेजिएट के 12 वीं का छात्र दिव्य प्रकाश अपने इनोवेशन से स्वदेशी टैंक का हाईटेक मॉडल विकसित कर रहे हैं। वे सरहद इलाकों में बगैर किसी मानवीय इस्तेमाल के आतंकवादियों से निपटने के लिए स्वचालित टैंक का मॉडल विकसित कर रहे हैं। छात्र को नासा की ओर से उसके लैब में काम करने का ऑफर दिया गया। लेकिन छात्र ने इस ऑफर को ठुकरा दिया। पिछले तीन वर्षों से वे अभिमन्यु – द गेम चेंजर नाम के रोवर पर काम कर रहे हैं।
जब इसमें अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल करने में पैसे की कमी आड़े आई तो बीबी कॉलेजिएट के शिक्षकों ने चंदा एकत्रित कर छात्र की सहायता की। छात्र ने बताया कि यह डिफेंस क्षेत्र में काम करने वाला एक रोवर होगा। इसमें 14 अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बीबी कॉलेजिएट के प्राचार्य डॉ सुनील कुमार राय ने बताया कि छात्र इनोवेशन पर काम कर रहा है। इसमें स्कूल के शिक्षकों ने चंदा देकर सहयोग किया है।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग का किया है इस्तेमाल
छात्र ने बताया कि रोवर में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया गया है। अगर कश्मीर जैसे क्षेत्र में अगर कोई आतंकवादी किसी बिल्डिंग में प्रवेश कर वहां के निवासियों को बंधक बनाता है तो इसमें रोवर अपना कमाल दिखाएगा। वह वहां पहुंचकर वहां के लोगों की तस्वीर को स्कैन करेगा। भवन में रखे गए गोला-बारूद से लेकर अन्य विस्फोटक पदार्थ की जानकारी भी इसमें लगे डिवाइस से मिलेगी।
इसे रिमोट से कंट्रोल किया जा सकेगा। बगैर मानव के ही इसे युद्ध क्षेत्र में भी भेजा जा सकेगा। अन्य कई कमाल के फीचर इसमें जोड़ा जा रहा है। छात्र ने बताया कि इसका नाम महाभारत के अभिमन्यु से प्रेरित है। इसका नाम उनके मेंटर संजय चौधरी ने ही रखा है। इसमें दूसरा साथी हर्ष राज भी मदद कर रहे हैं।
असफलता में छिपा है सफलता का राज : सेना में अफसर बनना चाहता था छात्र, अनफिट हुए तो रोवर बनाने लगे
बारहवीं का छात्र शुरू से एनडीए की परीक्षा पास कर सेना में ऑफिसर बनना चाहता था। मेडिकल अनफिट होने के कारण वह इसकी तैयारी नहीं कर सका। सातवीं कक्षा से ही स्टूडेंट्स आर्डिनो, रोबोटिक्स और अन्य तकनीकी ज्ञान अर्जित कर रहा था। सेना में नहीं जा सकने की जगह उसने अपनी उर्जा को डिफेंस सेक्टर के लिए रोवर बनाने में लगाना शुरू कर दिया।




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