एक तरफ सरकार शिक्षा और शिक्षण व्यवस्था में परिवर्तन का दंभ भर रहा। लेकिन दूसरे तरफ छपरा का एक विद्यालय शिक्षा विभाग का पोल खोलता नजर आ रहा। शहर के बीचोबीच मौना पंजाबी गली स्थित एक कमरे के विद्यालय अपने आप मे दुर्दशा का कहानी बयां कर रहा है। इस विद्यालय में मात्र दो कमरे है।जिसमे दो अलग अलग विद्यालय चलते है। एक ही भवन में दो विद्यालय श्री किशुन प्रसाद आदर्श मध्य विद्यालय के भूतल और प्रथम तल पर स्थित कमरा में संचालित होता है। भूतल पर संचालित होने वाले विद्यालय का नाम महेंद्र प्राथमिक विद्यालय,सलेमपुर है,जो बाद में टैग किया गया है। दोनो विद्यालय में कुल मिलाकर 472 छात्र है। इन दोनों विद्यालय में 15 शिक्षक तैनात है। मतलब 2 कमरे के 472 छात्र वाले विद्यालय में 15 शिक्षक। है ना कमाल की बात…
2 कमरे में 472 छात्र का वर्ष 1 से 8 तक पढ़ाते है 15 शिक्षक
इस विद्यालय में भूतल और प्रथम तल पर एक एक कमरा है।भूतल वाले कमरे में क्लास 1 से 5 तक की पढ़ाई होती है।यहाँ 5 क्लास के 135 बच्चों को पढ़ाने के लिए मात्र 3 शिक्षक है।जबकि प्रथम तल के कमरे में वर्ग 5 से 8 तक संचालित विद्यालय में कुल 337 बच्चों को पढ़ाने के लिए कुल 12 शिक्षकों की तैनाती की गई है। एक कमरे में अलग अलग दीवाल पर ब्लैक बोर्ड पर बना हुआ है। जिसमे बिभिन्न वर्गों को पढ़ाई होती है।
इस छोटे से विद्यालय में ज्यादा संख्या में शिक्षकों की तैनाती का वजह रसूखदार और पैरवीकार परिजन बताये जा रहे है।शहरी क्षेत्र और आसपास के पैरवी वाले लोग अपने अपने नजदीकी और रिश्तेदार को पैसे और पैरवी के बल पर पदस्थापना करवा देते है। स्कूल में पदस्थापित शशिक्षकों के परिवार कोई न कोई पैरवीकार जरूर। किसी शिक्षक के पति शिक्षक नेता तो किसी के पति अधिकारी, और बड़े व्यवसायी है।
इस विद्यालय को स्थानीय स्तर पर चकलेटिया विद्यालय के नाम से जाना जाता है। पतले संकीर्ण गली अवस्थित इस विद्यालय मे चॉकलेट बना करता था। जिसको लेकर छात्र आने जेन के दौरान सस्ते दामों में चॉकलेट खरीदते थे। जिसके चलते इस गली और विद्यालय का नाम चकलेटिया विद्यालय पड़ गया।



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