यूपी में का का बा’ बिहार की लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने गाया था। इसके जवाब में बुंदेलखंड की कवयित्री अनामिका जैन अम्बर ने गाया था- ‘ यूपी में बाबा है… यूपी में बाबा है…।’ उसी कवयित्री अनामिका जैन अम्बर को हरिहर क्षेत्र सोनपुर के चर्चित मेले में कविता पाठ से रोक दिया गया! अनामिका ने सोशल मीडिया पर खुद सामने आकर इस दर्द को सामने रखा कि दिनकर की धरती पर उन्हें कविता पाठ नहीं करने दिया गया और बिना कविता पढ़े वह वापस जा रही हैं।
राजनीतिक महकमे में इसकी चर्चा खूब है कि योगी आदित्यनाथ का पक्ष लेना ही बिहार में उन्हें भारी पड़ गया। नीतीश कुमार ने 2020 के विधान सभा चुनाव के बाद बीजेपी के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाई थी लेकिन अब वे लालू-तेजस्वी की पार्टी के साथ महागठबंधन सरकार चला रहे हैं। इस बार अनामिका अम्बर को कविता पाठ से रोका गया, इससे पहले तो एक बार नीतीश सरकार ने तीन करोड़ 60 लाख रुपए से होने वाला एक बड़ा आयोजन ही रद्द कर दिया था।
जनवरी 2018 को सत्याग्रह विश्व कविता समारोह होना था पर नहीं हुआ
बिहार में वर्ष 2013 और फिर 2014 में भारतीय कविता समारोह का आयोजन हुआ था। इस आयोजन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चर्चित कवि-लेखक अशोक वाजपेयी से कहा था कि इस आयोजन को वार्षिक कर दें। लेकिन दो आयोजन के बाद यह नहीं हो पाया। इसकी जगह 2018 में विश्व कविता समारोह करने की योजना बिहार में बनी। वर्ष 2017-18 में सत्याग्रह विश्व कविता समारोह नाम से इस आयोजन को करने की योजना बनी। समय तय किया गया जनवरी 2018 का।
इसके लिए नीतीश सरकार ने तीन करोड़ 60 लाख रुपए का बजट भी निर्धारित कर दिया। लेकिन इसी बीच RJD के साथ नीतीश कुमार का गठबंधन टूट गया और नई सरकार बीजेपी के साथ उन्होंने बनाई। 26 जुलाई 2017 को नीतीश कुमार ने RJD को छोड़ बीजेपी का साथ ले लिया था। कला संस्कृति विभाग में मंत्री शिवचंद्र राम की जगह कृष्ण कुमार ऋषि आ गए। बीजेपी का साथ पाने के बाद नीतीश कुमार के पास जब विश्व कविता समारोह की फाइल गई तो फिर सकारात्मक जवाब के साथ फाइल लौटी ही नहीं! नतीजा यह हुआ कि विश्व कविता समारोह नहीं ही हुआ। रद्द हो गया।
तब नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी एग्रेसिव थे नीतीश कुमार
साहित्यिक जगत में इसकी खूब चर्चा रही कि बीजेपी के खिलाफ पुरस्कार वापसी का अभियान बिहार से देश भर में चलवाया गया था। कई लेफटिस्ट लेखकों ने पुरस्कार लौटाए थे। यही नहीं तब यह बात भी खूब चर्चा में थी कि अशोक वाजपेयी के साथ अन्य लेखकों की मीटिंग भी करवायी गई थी। वैचारिक स्तर पर बीजेपी को डायमेज करने का जैसे मास्टर प्लान तैयार किया गया था ! साहित्यिक जगत में चर्चा यहां तक हुई थी कि पुरस्कार वापसी मुहिम चलाने के पुरस्कार स्वरुप तीन करोड़ 60 लाख का बजट अशोक वाजपेयी के लिए तैयार किया गया था कि वे विश्व कविता समारोह कराएं। विश्व कविता समारोह का आयोजन बिहार में करके मोदी विरोध को नीतीश धार देना चाहती थे ! तब नरेन्द्र मोदी के खिलाफ नीतीश कुमार काफी एग्रेसिव थे। लेकिन जब लालू प्रसाद के तेवर से नीतीश शासन में असहज होने लगे तो वापस भाजपा के साथ आ गए। भाजपा के साथ आते ही विश्व कविता समारोह का आयोजन भी स्थगित हो गया। उसके बाद से आज तक वह आयोजन नहीं हो सका।
यह भाजपा विरोधी पार्टियों को एकजुट करने की मुहिम का ही हिस्सा- विनोद अनुपम
लेखक विनोद अनुपम कहते हैं कि बिहार में हिंदी भवन से लेकर विभिन्न अकादमियों का हाल देख लीजिए और समझ लीजिए कि नीतीश सरकार साहित्य- संस्कृति के प्रति कितनी सजग है! अब एक बार फिर नीतीश कुमार पीएम बनने की जुगाड़ में लगे हैं और भाजपा विरोधी पार्टियों को एकजुट करने की मुहिम चला रहे हैं। अनामिका जैन अम्बर को कविता पाठ से रोकना उसी मुहिम का हिस्सा है। कई लेखकों ने अनामिका अम्बर के पक्ष में बातें कही हैं। बीएन विश्वकर्मा ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि बिहार में अनामिका अम्बर को कविता पाठ से रोकना अतिथि का अपमान जैसा कृत्य है। दोषी अधिकारियों को तुरंत दंडित करना चाहिए।





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