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13 हजार फीट से जंप करने वाली बिहार की ईशा:55 सेकंड में कई बार मौ’त का सामना, लगा हवा में ही चली जाएगी जान

घर की बालकनी से झांकने में डर लगता था। बाइक की रफ्तार तेज होते ही चीख पड़ती थी। फ्लाइट से डरती थी, कभी झूला तक नहीं झूली। ऊंचाई से डरने वाली लड़की को जब 36 साल की उम्र में 13 हजार फीट से छलांग लगाने को कहा गया। और उसने छलांग भी लगाई। हम बात कर रहे हैं पटना के कंकड़बाग की रहने वाली बिहार की पहली महिला स्काई-डाइवर ईशा राज की।

रच दिया इतिहास

ईशा राज के अनुसार, जब उन्होंने पहली बार 13 हजार फीट से छलांग की बात सुनी तो खाना-पीना छोड़ दिया और आंखों से नींद उड़ गई। समय आया और फ्लाइट आसमान में उड़ी, 13 हजार फीट से धक्का दे दिया गया। आसमान से 200 किलो मीटर की प्रति घंटे की रफ्तार से नीचे की तरफ गिरने लगी, कई बार मौत का सामना हुआ। ऊंचाई और रफ्तार से लगा कि हवा में ही जान चली जाएगी और जमीन पर डेड बॉडी गिरेगी। 55 सेकेंड बाद जब नीचे आई तो 20 मिनट तक यकीन नहीं हुआ कि वह जिंदा है। लेकिन डर को लाइफ से अलग किया तो इतिहास रच दिया।

ईशा राज पटना के कंकड़बाग के रहने वाली रिटार्ड बैंककर्मी स्वर्गीय श्याम निराला की बेटी हैं।

ईशा राज पटना के कंकड़बाग के रहने वाली रिटार्ड बैंककर्मी स्वर्गीय श्याम निराला की बेटी हैं।

पटना के सामान्य परिवार से दुबई का सफर

ईशा राज पटना के कंकड़बाग के रहने वाली रिटार्ड बैंककर्मी स्वर्गीय श्याम निराला की बेटी हैं। दो बहन और एक भाई में ईशा सबसे बड़ी है। भाई बिजनेस करता है, छोटी बहन त्रिशा योगा ट्रेनर हैं। सामान्य परिवार में जन्मी ईशा को बचपन से ही ऊंचाई और रफ्तार से डर लगता था। पटना में ही पढ़ाई पूरी की और 2014 में गोपालगंज के अभिषेक रावत के साथ शादी हुई। शादी के बाद से डर से सामना होने लगा।

पति अबू धाबी में डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ में नौकरी करते हैं। इसलिए ईशा को वहां जाना था। अब चुनौती फ्लाइट में सवारी की थी। ऊंचाई और रफ्तार से डरने वाली ईशा ने फ्लाइट में आंख बंद कर यात्रा पूरी की। पटना के सामान्य परिवार से अबू धाबी पहुंची ईशा की पहली हवाई यात्रा ने दिल से डर को थोड़ा दूर किया।

पति का जज्बा देख डर से आगे निकली

ईशा और अभिषेक के शौक काफी अलग-अलग रहे। ईशा को ऊंचाई से डर लगता था जबकि अभिषेक रफ्तार और ऊंचाई से ही खेलते थे। अबू धाबी में हेल्थ डिपार्टमेंट में नौकरी करने के साथ अभिषेक स्काई-डाइविंग भी करते थे। पति का शौक देख ईशा का डर और थोड़ा कम हुआ। इसके बाद भी वह ऊंचाई और रफ्तार से पहले की तरह डरती रही।

अभिषेक रावत ने ईशा के अंदर से डर निकालने के लिए कई बार जंप कराने का प्रयास कराया लेकिन डर भारी पड़ा। इस बीच ईशा को बेटा पैदा हुआ वह घर परिवार में व्यस्त हो गई। घर की छत से झांकने में डरने वाली ईशा को अभिषेक ने बदलने का प्रयास की और उसे स्काई-डाइविंग के बारे में बताना शुरू किया। पति का जज्बा देख ईशा को भी हिम्मत आई, वह भी धीरे-धीरे उड़ान भरने लगी। थोड़ी ऊंचाई से अभिषेक ने ईशा का डर खत्म कराया।

ईशा का कहना है कि वह 6 साल के बच्चे की मां है।

ईशा का कहना है कि वह 6 साल के बच्चे की मां है।

36 साल की उम्र में 13 हजार फीट से जंप

36 साल की उम्र में ईशा को 13 हजार फीट पर ले जाया गया। सुरक्षा उपकरणों से लैस ईशा को 13 हजार फीट पर ले जाकर अभिषेक ने धक्का दे दिया और बाद में खुद भी कूद पड़े। विशेष तरह की फ्लाइट से आसमान से जंप होते ही ईशा की सांस थम गई। वह समझ ही नहीं पा रही थी कि ऐसा क्यों हो रहा है। वह 200 किलो मीटर की रफ्तार से नीचे गिर रही थी। इस बीच उन्हें पैराशूट भी खोलना था। हाथ-पैर काम नहीं कर रहा था और दिमाग भी नहीं।

ईशा बताती हैं कि उन्हें बस यही लग रहा था कि अब हवा में ही उनके प्राण निकल जाएंगे और जमीन पर उनकी डेड बॉडी गिरेगी। वह 13 हजार फीट से 55 सेकेंड में नीचे आ गई, लेकिन इस बीच कई बार उनका मौत से सामना हुआ। ईशा बताती हैं कि रफ्तार और ऊंचाई दोनों से उन्हें डर लगता था और एक साथ दोनों से सामना करना मौत को सामने देखना था। ईशा का कहना है कि वह 6 साल के बच्चे की मां है, 55 मिनट में बेटे से लेकर सब कुछ याद आ गया।

ईशा ने कहा, सच में डर के आगे जीत है

एक बार में ऊंचाई और रफ्तार से सामना होने के बाद उनके अंदर से काफी हद तक डर निकल गया। इसके बाद वह दो तीन बार डर के जंप की लेकिन अब उनके लिए खतरों से खेलना आसान हो गया है। ईशा ने बताया कि अब तक वह 35 बार 13 हजार फीट से जंप लगा चुकी हैं। अब एक दम डर नहीं लगता है।

ईशा का कहना है कि यह स्लोगन सच है कि डर के आगे जीत ही होती है। वह जब तक डर रही थी, तब तक लगता था कि ऊंचाई और रफ्तार में ही मौत है। लेकिन जब 13 हजार फीट से जंप करने लगी तो दिल से डर ही खत्म हो गया है। अब तो वह आसमान से लेकर धरती पर कहीं भी नहीं डरती हैं। अब वह आसानी से फ्लाइट से 13 हजार फीट पर हंसते-हंसते जाती हैं और वहां से सुरक्षा उपकरणों से जंप करती हैं।

ईशा पति और बच्चे के साथ।

ईशा पति और बच्चे के साथ।

भारत की 7वीं और बिहार की पहली महिला स्काई-डाइवर

पटना की ईशा भारत की 7वीं और बिहार की पहली महिला (सिविलियन) स्काई-डाइवर बन गई हैं। अब तक बिहार की किसी सिविलियन महिला ने इतनी ऊंचाई से जंप नहीं किया है। ईशा का कहना है कि उन्हें खुशी है कि वह बिहार की पहली महिला स्काई-डाइवर बनी हैं। वह बिहार की बेटियों को संदेश दे रही हैं कि कोई भी बेटी डरे नहीं, ऊंचाई हो या रफ्तार या फिर समाज, कहीं भी डरने की जरूरत नहीं है।

ईशा का कहना है कि डर से बाहर निकलने वाली हर बेटियों ने इतिहास रचा है। ईशा को गर्व है कि वह 13 हजार फीट से जंप करने वाली पहली सामान्य सिविलियन महिला हैं। ईशा राज 13 हजार फीट की ऊंचाई से जंप कर बिहार की बेटियों को हमेशा बड़ा संदेश देना चाहती हैं। वह पहली लाइसेंस्ड असैनिक महिला स्काई-डाइवर के रूप में बिहार का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। अब तक 35 जंप लगाने वाली ईशा, अपनी अद्वितीय उपलब्धि पर गौरवान्वित हैं।

ईशा के पति अब तक कर चुके हैं 435 जंप

ईशा के पति अभिषेक रावत भी स्काई-डाइवर हैं। वह अब तक 435 जंप कर चुके हैं। ईशा और अभिषेक बिहार के पहले स्काई-डाइवर दंपती होने का गौरव भी अपने नाम कर चुके हैं। ईशा बताती हैं कि अब वह आबू धाबी में दुनिया की प्रमुख पी.आर. एजेंसियों में से एक एडेलमैन की सीनियर अकाउंट मैनेजर हैं।

वह अपने 6 साल के बेटे से भी बचपन से डर से दूर रहने की बात करती है। ईशा जिस तरह से अपने पति के स्काई-डाइविंग के जुनून को देखते हुए डर से बाहर निकलीं, ऐसे ही बच्चे के अंदर डर नहीं आने देंगी।

ईशा का कहना है कि वह 2022 में ही अबू धाबी में यूनाइटेड स्टेट्स पैराशूट एसोसिएशन (यू.इस.पी.ए.) का एक्सेलरेटेड फ्री फॉल (ए.एफ.एफ) कोर्स शुरू की थी और तेज़ी से ‘ए’ लाइसेंस की ओर कदम बढ़ाया। जो कम से कम 25 जंप में मिलता है। ईशा और अभिषेक दुनिया के कुछ ही प्रो-फ्लायर्स में से हैं जो भारत के पहले विंड टनल, ग्रैविटी ज़िप, हैदराबाद, में इनडोर स्काई-डाइव कर चुके हैं।

ईशा ने लाइफ से डर को दूर किया और इतिहास रच दिया।

ईशा ने लाइफ से डर को दूर किया और इतिहास रच दिया।

बेटियों के लिए मॉडल हैं ईशा

बिहार ही नहीं देश की बेटियों के लिए भी ईशा मॉडल हैं। कदम कदम पर डरने वाली ईशा ने लाइफ से डर को दूर किया और इतिहास रच दिया। ऐसे ही हर बेटी को अपने अंदर से डर को दूर कर सफलता की सीढ़ियां चढ़नी चाहिए। यह मुकाम उनके साहस और दृढ़ निश्चय का ऐसा प्रतीक है जो सिर्फ बिहार के लिए ही नहीं, पूरे भारत के लिए प्रेरणादायक है।

ईशा की उपलब्धि यह बताती है की महिलाओं को पंख फैलाकर आसमान में उड़ान भरने के लिए बस हौसले की जरूरत है। यही हौसला महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने वाला होता है। दुनिया के सबसे बड़े विंड टनल, क्लाइंब अबू धाबी में अभ्यास करने वाली ईशा, अधिक से अधिक महिलाओं को संकोच और भय का सामना कर, एक्सट्रीम एडवेंचर स्पोर्ट्स अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती हैं। उनका मानना है कि महिलाएं अपने आत्मविश्वास के पर बांधकर, ऊंची से ऊंची मंज़िलें तय कर सकती हैं।

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