पूर्णिया में खादी माॅल के लिए 8 करोड 41 लाख रुपये आवंटन किया गया है, पूराने जर्जर भवन को तोड़कर तीन मंजिला खादी मॉल बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। बिहार सरकार ने खादी उत्पादन और बिक्री के लिए एक नई पहल शुरू की है। दरअसल अंग्रेजी हुकूमत के समय महात्मा गांधी की पहल पर वर्ष 1947 से पहले पूर्णिया के भट्ठाबाजार गांगुलीपाडा में खादी ग्रामोद्योग खोला था, जहां खादी वस्त्रों का उत्पादन और विशुद्ध खादी वस्त्र सस्ते दामो पर उपलब्ध कराया जाता था और गांधी जी के सपनो को साकार किया जाता था।
सरकारी उदासीनता का भेंट चढा खादी ग्रामोद्योग
आजादी के बाद वह खादी ग्रामोद्योग सरकारी उदासीनता की भेंट चढ गया। गांधी जी के सपने चकनाचूर हो गए। करीब 30 वर्ष पहले पूर्णिया के ऐतिहासिक खादी ग्रामोद्योग को बंद कर दिया गया। उधोग बंद होने से सैंकड़ो लोग बेरोजगार हो गए। पूर्णिया के लोग मुंह ताकते रह गए और उदासीनता के अलावा और कुछ हाथ नहीं लगा। देखते ही देखते खादी ग्रामोद्योग का आलिशान भवन खंहर में तब्दील हो गया। भवन स्थानीय लोगो के लिए कचरा फेंकने का काम आने लगा। जब खादी ग्रामोद्योग की चर्चा लगातार मीडिया में आने लगे तो राज्य सरकार की आंखे खुल गई। कुछ ही महीने पूर्व सरकार ने पूर्णिया और मुजफ्फरपुर में खादी माॅल खोलने का फैसला लिया, जिसमें पूर्णिया में खादी माॅल के लिए 8 करोड 41 लाख रुपये आवंटन किया गया। अब पूराने जर्जर भवन को तोड़कर तीन मंजिला भवन बनने की तैयारी शुरू हो गई है।
रोजगार के अवसर भी मिलेगें
उधोग विभाग के महाप्रबंधक सुशील कुमार ने बताया कि यह माॅल 12 कट्टा जमीन में बनाया जा रहा है। माॅल में खादी के कपडे और प्रोडक्ट उपलब्ध होगें। सस्ते और किफायती दामों में उपलब्ध होगा। माॅल एक साल के अंदर बनकर शुरू हो जाएगा। इससे प्रशस्त रोजगार के अवसर भी मिलेगें।




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