उत्तर बिहार के सबसे बड़े अस्पताल एसकेएमसीएच में आई बैंक डेढ़ साल से बनकर तैयार है। इसे चलाने के लिए लाइसेंस भी मिल चुका है। लेकिन, टेक्नीशियन नहीं हाेने से यह अब तक चालू नहीं हुआ। यह कब चालू हाेगा, इसके बारे में भी जिम्मेदार स्पष्ट नहीं बता रहे। प्राचार्य डाॅ. विकास कुमार कहते हैं कि अपडेट पता नहीं है, अधीक्षक से पूछ लीजिए। अधीक्षक डाॅ. बाबूसाहेब झा कहते हैं कि सब पूरा कर दिए, लेकिन विभागाध्यक्ष टालमटाेल कर रहे। ….और नेत्र राेग विभागाध्यक्ष डाॅ. राजीव कुमार सिंह कहते हैं कि टेक्नीशियन-काॅर्डिनेटर समेत 6 लाेगाें की टीम नहीं हाेने के कारण चालू नहीं हाे रहा।
इसके लिए सरकार काे डेढ़ साल से आधा दर्जन बार लिखा गया। नियुक्ति हाेते आई बैंक चालू कर दिया जाएगा। बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दधीचि देहदान याेजना के तहत अगस्त 2017 में राज्य के सभी मेडिकल काॅलेजाें में आई बैंक खाेलने की घाेषणा की थी। पीएमसीएच के बाद राज्य के दूसरे बड़े मेडिकल काॅलेज-अस्पताल एसकेएमसीएच में उसी समय आई बैंक खाेलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।
आई बैंक चालू नहीं हाेने से नेत्रदान नहीं हाे पा रहा, 8 आवेदन एसीएमओ कार्यालय में
आई बैंक चालू नहीं हाेने से नेत्रदान भी नहीं हाे पा रहा। 8 लाेगाें ने ताे एसीएमओ कार्यालय में आवेदन भी दे रखा है। बिहार रक्तदाता समूह के प्रिंसू माेदी के पत्र पर सांसद अजय निषाद ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया से अनुराेध किया। मांडविया ने 28 अक्टूबर काे राज्य स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव से इसके लिए जरूरी संसाधन के साथ रिपाेर्ट मांगी। रिपाेर्ट मिलने पर एसकेएमसीएच काे लाइसेंस दे दिया गया। पर, मामला टेक्नीशियन काे लेकर फंस गया।
आंख लगवाने के लिए भटक रहे माेतियाबिंद ऑपरेशन के दाैरान आंख गंवाए थे कई पीड़ित
मुजफ्फरपुर आई हाॅस्पिटल में माेतियाबिंद के ऑपरेशन के दाैरान आंख गंवाए पीड़ित आंख लगवाने के लिए भटक रहे हैं। बेतिया के अनिरुद्ध साह, चकिया की अनिता देवी का कहना है कि आई बैंक खुल गया हाेता ताे शायद उनके जैसे आंख गंवाए कई लाेग दुनिया देख पाते। पटना के निजी आई बैंक में दाे लाख रुपए खर्च बताने पर लाैट आए। अब सीएस काे आवेदन देकर आंख लगवाने की व्यवस्था कराने की गुहार लगाई है। यह स्थिति तब है जब एसकेएमसीएच में आई बैंक बनकर तैयार है। बस एक टेक्नीशियन नहीं है।




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