बीते आठ सितंबर को देश के सबसे बड़े रबर डैम का उद्धघाटन किया गया था। आम आदमी के लिए सार्वजनिक किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने इसकी स्वच्छता को लेकर ठोस निर्णय लिया है। डैम में पिंडदान से जुड़ी सामग्री को छोड़ कर अन्य कोई भी पूजन सामग्री या फिर कूड़ा कचरा फेंकना प्रतिबंधित कर दिया गया है।
इसकी देख रेख की जिम्मेदारी विष्णुपद मंदिर से जुड़े पंडा समाज के लोगों को ही दी गई है। वे ही लोगों को डैम में किसी प्रकार का कोई भी सामान फेंकने से रोकेंगे। साथ ही उन्हें आग्रह पूर्वक ऐसा नहीं करने की नसीहत देंगे। इसके अलावा डैम के निकट साफ सफाई के लिए नगर निगम के 20 कर्मचारी लगाए गए हैं। इन सभी कर्मचारियों को कहा गया है कि डैम की शुद्धता व स्वच्छता से जुड़े पहलू पर नजर रखनी होगी। यदि कोई डैम में कूड़ा कचरा डालता है तो उसे प्रेम पूर्वक रोकना होगा।
साल भर पानी रखने का उद्धेश्य
इस मसले पर डीएम डॉ त्यागराजन ने कहा कि गयाजी डैम निर्माण के बाद से फल्गु नदी के देवघाट में सालों भर पानी रखने का उद्देश्य है। नदी का पानी स्वच्छ रहे, इसके लिए नगर निगम और कार्यपालक अभियंता ने निर्देश दिया है कि डैम की साफ सफाई पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि अब लगभग सालों भर तीर्थयात्री अपने पूर्वजों का पिंड दान करने देवघाट विष्णुपद आते हैं। इसके बाद फल्गु नदी में तर्पण करते हैं।
सिर्फ पिंडदान की सामग्री डैम में दी जाए
तर्पण के पश्चात पूजा सामग्री नदी में ही प्रवाहित करते हैं, जिसे लेकर नदी का पानी प्रदूषित होने की आशंका है। उन्होंने पंडा समाज के पुरोहितों से अपील की है कि पितृपक्ष को छोड़ कर अन्य सामान्य दिनों में भी डैम में गंदगी नहीं की जाए। सिर्फ पिंडदान की सामग्री ही नदी में प्रवाहित करें। इससे आसानी से नदी के पानी को जाल के माध्यम या अन्य माध्यमों से साफ करवाया जा सके।



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