अब सरकारी स्कूलों में 12वीं तक के बच्चे अपनी स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं में मनोरंजक, ज्ञानवर्द्धक कॉमिक्स से लेकर महापुरूषों की जीवनी तक पढ़ सकेंगे। योग और खेल संबंधी पुस्तकों को रूचि लेकर बच्चे पढ़ सकेंगे। सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में विभिन्न कक्षाओं के बच्चों के लिए इस तरह की पुस्तकें बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी।
इसके लिए बीईपी ने एनबीटी, सीआईआईएल सहित सरकारी और निजी प्रकाशकों से इस तरह की पुस्तकों की जानकारी मांगी है। पुस्तक चयन बीईपी की स्क्रीनिंग कमेटी करेगी। विभिन्न भाषा व विषयों के विशेषज्ञों की कमेटी से चयन के बाद पुस्तक खरीद कर स्कूलों में उपलब्ध कराई जाएगी। अपनी कक्षा की पुस्तकों के अलावा ऐसी पुस्तकों से बच्चों की तर्कशक्ति बढ़ेगी।
सामान्य ज्ञान, मनोरंजक, ज्ञानवर्धक, पर्यावरण से संबंधी पुस्तकों से बच्चों को लाभ होगा। नैतिक, राष्ट्रीय और सामाजिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाले तत्व, बिहार राज्य की कला, संस्कृति, इतिहास, भूगोल, पर्व से लेकर महापुरुषों की जीवनी और प्रेरक कहानियां बच्चे आत्मसात कर सकेंगे। स्कूलों की पुस्तकालयों में उपलब्ध होने वाली ये पुस्तकें अब हिंदी, मैथिली, भोजपुरी, अंगिका, बज्जिका, मगही, जनजातीय भाषा सूर्यापुरी और उरांव में भी होंगी।
बिहार शिक्षा परियोजना परिषद सरकारी और निजी प्रकाशकों से इन पुस्तकों का क्रय करेगा। इसके लिए सरकारी प्रकाशक एनबीटी, सीआईआईएल सहित प्राइवेट पब्लिशर्स इन पुस्तकों की क्षेत्रीय भाषाओं में आपूर्ति के लिए आवेदन कर पाएंगे। इसकी आखिरी तिथि 12 नवंबर निर्धारित की गई है। रा
ज्य के 40492 प्राथमिक विद्यालय, 25649 उच्च प्राथमिक विद्यालय, 2265 माध्यमिक विद्यालय और 7018 उच्च माध्यमिक विद्यालयों में इन पुस्तकों की आपूर्ति की जाएगी। आपूर्तिकर्ताओं के लिए नियम व शर्तें https://www.bepcssa.in/en/ पर उपलब्ध कराई गई हैं। बीईपी की अपर राज्य परियोजना निदेशक किरण कुमारी ने कहा कि स्थानीय भाषा में बच्चों को ज्ञानवर्द्क और मनोरंजक पुस्तक उपलब्ध कराई जाएगी। विभिन्न स्कूलों की लाइब्रेरी में इस तरह की पुस्तकें भेजी जानी है।
क्षेत्रीय भाषा में बच्चे पढ़ पाएंगे बाल पत्रिका से लेकर कॉमिक्स
स्कूल में बच्चे अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में बाल पत्रिका और कॉमिक्स पढ़ पाएंगे। अब तक बच्चे हिंदी या अंग्रेजी में ही कॉमिक्स के चित्रों को देख सकते थे। कहानी की किताबें, भाषा और कौशल का विकास करने वाली पुस्तकें, लिखने और स्वयं को अभिव्यक्त करने की क्षमता, शब्द ज्ञान, सृजनात्मक, तार्किक सोच, गहन चिंतन और वास्तविक जीवन से खुद का समन्वय स्थापित कर पाएंगे। पाठ्य पुस्तक, संदर्भ पुस्तक, परीक्षा संबंधी पुस्तक और 18 वर्ष तक की उम्र के लिए उपयोगी नहीं होने वाली पुस्तकों पर विचार नहीं किया जाएगा।





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