राजधानी पटना में त्योहारों की तैयारी की रौनक देखते बन रही है। दो साल बाद बिना किसी प्रतिबंध के त्योहारों का आयोजनों को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पटना पुलिस भी पूरी तरह तैयार है। इसी बीच पटना में बड़ी संख्या में दशहरा और छठ में 750 कैडेट्स की डिप्लॉयमेंट करने की योजना बनी है। जिन जिलों में कम्यूनिटी पुलिस की प्रतिनियुक्ति हो रही है, वहां बड़ी संख्या में लड़के-लड़कियां दोनों ही कैडेट्स होंगे। साथ ही जो वुमन रिस्क के लिए टीम है, जो गर्ल्स कैडेट्स हैं, वह भी ट्रेनिंग युक्त होंगी। इनका भी बड़ा योगदान होगा। इनका रोल कुछ इस प्रकार है
क्राउड मैनेजमेंट, छेड़खानी और बच्चा खोने पर रहेगा विशेष ध्यान
कम्यूनिटी ट्रैफिक पुलिस एवं सह स्टेट कोड एनसीसी उड़ान संयोजक धीरज कुमार ने बताया कि पिछले दो साल से कोविड के कारण बड़े पैमाने पर दशहरा का आयोजन नहीं किया गया था। जिस वजह से इनका डिप्लॉयमेंट नहीं हो पाई थी। इस बार हर जगह अभी से ही जाम और रश है, इसलिए हमारी जिम्मेदारी बड़ी है। क्राउड मैनेजमेंट, छेड़खानी, बच्चा खो जाना या अन्य जो दिक्कतें आती हैं तो कैडेट्स उसे सुलझाते हैं।

क्या रहेगा कैडेट्स का रोल और शिफ्ट
धीरज ने अनुसार कैडेट्स की प्रतिनियुक्ति पहली शिफ्ट शाम के टाइम पांच बजे से रात्रि दस बजे तक रहेगा। वहीं जो परिपक्व कैडेट्स हैं, जिनकी काफी हार्ड विलिंगनेस होती है। जो रात्रि में भी सेवा देने के लिए इच्छुक हैं, वह रात को दस बजे से सुबह तक रहेंगे। चुंकि आमतौर पर नवमी को काफ़ी भीड़ होती है और दशमी को सेंट्रलाइज भीड़ होगी। खासकर गांधी मैदान में बिहार के सभी जगह से लोग आते हैं। इसमें जो कैडेट्स का रोल होता है, वह लॉ एंड ऑर्डर के साथ बहुत ही डेकोरेटिव होता है।
यदि किन्हीं को आने-जाने में असुविधा होगी या उन्हें बताना है कि कौन सा मार्ग बंद है या किस मार्ग से गाड़ी नहीं जा सकती या जिला प्रशासन द्वारा पार्किंग का क्या सेनारियो तय किया गया है, इन सबके बारे में लोगों को जागरूक करना इनका डेकोरेटिव रोल होगा। साथ में पुलिस का भी मदद करना इनकी प्राथमिकता होगी। यह पुलिस को एसिस्ट करेंगे और उनके साथ कदम से कदम मिलाकर ड्यूटी करेंगे, जिससे पुलिस को भी काफी सहायता मिलेगी। इससे यह अनुशासन के बारे में भी समझेंगे और इनका मनोबल भी बढ़ेगा।

कैडेट्स के लिए क्या-क्या रहेगी व्यवस्था
धीरज ने आगे बताया कि कुछ बच्चे दूर से आते हैं, जैसे – मसौढ़ी, भोजपुर, मोकामा या वैशाली। उन 40 से 50 बच्चों के आवासन की व्यवस्था हेडक्वार्टर में हम अपने स्तर से करते हैं। साथ ही सभी कैडेट्स के खाने-पीने की व्यवस्था भी रहेगी। वैसे तो ज्यादातर बच्चे अपने घर से आते हैं। जिला प्रशासन उन्हें बस देती है और बस के लिए एक पिकअप ड्रॉप लोकेशन जगह-जगह पर रहती है।
बता दें कि बिहार के सभी जिले में एनसीसी के लगभग बीस यूनिट हैं, जो 38 डिस्ट्रिक्ट को कवर करती हैं। कम्युनिटी ट्रैफिक पुलिस एनसीसी कैडेट्स होते हैं। सैन्य युवा संगठन भारत का एकलौता संगठन है जो प्री-मिलिट्री ट्रेनिंग से युक्त होते हैं। बी सर्टिफिकेट, सी सर्टिफिकेट होल्डर एनसीसी के जो कैडेट्स हैं, उनकी डिप्लॉयमेंट आम तौर पर दशहरा और छठ में होती है। हर जिले के अपने कैडेट्स होते हैं।



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