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तेजस्वी ने जिन 5 बातों पर फोकस किया वे कौन?:BJP से लड़ और सीख भी रहे, अतिपिछड़ा- दलित वोट बैंक मजबूत करने का टास्क दिया

राष्ट्रीय जनता दल पर जंगलराज का लेबल हटाने में तेजस्वी को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। यही मशक्कत तेजस्वी को राजद को ए टू जेड की पार्टी बनाने में करनी पड़ रही है। बुधवार को राजद की राज्य परिषद की बैठक में जब तेजस्वी यादव ने बोलना शुरू किया तब भी यह खूब दिखा। तेजस्वी ने पांच बड़ी बातें पार्टी की इस अति महत्वपूर्ण बैठक में की। वे पांच बातों कौन-कौन सी हैं और उसके राजनीतिक मायने क्या हैं समझिए-

1- तेजस्वी ने कहा- पार्टी के कार्यकर्ता कहीं भी हुड़दंग नहीं करें, अनुशासन में रहें

लालू प्रसाद के समय राजद शासनकाल में बिहार में जंगलराज शब्द पॉपुलर हुआ था। राजद की छवि ऐसी पार्टी की हो गई थी जो बिहार बंद का आह्वान करती थी तो दुकानदार इस डर से ही शटर नहीं उठाते थे कि दुकान के सामान लूट लिए जाएंगे। लोग घरों से निकलते नहीं थे। राजद की रैलियों, जुलूस में आते- जाते लोगों से भी लोग डरते थे। ऐसा था हुड़दंग का खौफ। ये सब दौर तेजस्वी ने भी देखा है। अब तेजस्वी राजद को बदलने में लगे हैं। इसलिए तेजस्वी को जगदानंद जैसे नेता पसंद हैं जो कड़े फैसले लेते हैं और अनुशासन का कड़ाई से पालन करते और कराते हैं। तेजस्वी ने बुधवार को राज्य परिषद की बैठक में जिलाध्यक्षों सहित सभी कार्यकर्ताओं को नसीहत दी कि इस पर नजर रखिए कि पार्टी का कोई कार्यकर्ता हुड़दंग नहीं करे। कोई चीज अचानक से नहीं बदल जाती। कहा कि जिस दिन हमारी सरकार बनी हमलोगों ने वोट दिया भाजपा माइंड सेट वाली मीडिया सोच रहा था कि हुड़दंग होगा, हुड़दंग होगा…लोगों को तंग किया जाएगा। हम सभी लोगों को धन्यवाद देते हैं कि कोई हुड़दंग नहीं हुआ। सभी को आगे भी अनुशासन में रहना है।

2. जिलों में पार्टी के हेड जिलाध्यक्ष होंगे

तेजस्वी अपनी दुश्मन पार्टी भाजपा से लड़ भी रहे हैं और सीख भी ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री अगर जिला अध्यक्ष को सम्मान दे रहे हैं तो इससे अच्छा मैसेज जाएगा। जब तक सम्मान नहीं दीजिएगा जिला अध्यक्ष का कोई वैल्यू नहीं। जिनसे आपकी लड़ाई है वहां जाकर आप देखिए कोई प्रभारी भी आता है तो सारे केन्द्र के मंत्री पीछे-पीछे रहते हैं। हमें संगठन को ज्यादा महत्व देना है। पार्टी का जो स्ट्रक्चर है उसमें न मंत्री होता है और न एमएलए होता है। विधायक और मंत्री तो सदस्य हैं संगठन में। इस बात को लेकर किसी को बुरा नहीं लगना चाहिए। एक संतुलन संगठन में हमलोग बनाने का काम करें। पहले भी कहा था हमने कि परफॉर्मेंस बेस्ड पार्टी तैयार करेंगे। गणेश परिक्रमा करने वाले अभी भी हमको समझ लें, वक्त है। हमारे कंधे पर जिम्मेवारी मिली है और 2024 में महागठबंधन के लोगों को 40 सीटों पर चुनाव जितवाने का लक्ष्य है तो जब तक जमीन पर रहने वाले कार्यकर्ता को शक्ति नहीं देंगे तब तक यह लक्ष्य हासिल नहीं होगा।

3. अतिपिछड़ों और दलितों को जोड़िए

बिहार में अतिपिछड़ों का वोट बैंक लगभग 40 फीसदी है और दलितों का लगभग16 फीसदी। तेजस्वी यादव राजद के वोट बैंक में इन दोनों वोट बैंक को जोड़ना चाहते हैं। वे पार्टी को एटूजेड की पार्टी बनाने में लगे हैं। तेजस्वी ने कहा कि गरीबों को जोड़ने का काम करना है। अतिपिछड़ों को जोड़ना है। अंतिम पायदान के लोगों को जोड़ना है। मुसलमानों में गरीब हैं, हिन्दुओं में गरीब हैं। वे तब जुड़ेंगे जब आपका व्यवहार अच्छा होगा। जब आप अपनी कुर्सी छोड़कर उनको बैठाइएगा तब वे जुड़ेंगे। आपलोग अतिपिछड़ों के टोलो में जाइए। दलितों के टोलों में जाइए। उनको सम्मान दीजिए, तब वे पार्टी से जुडे़ंगे। सभी लोगों को जोड़िए। हमको सब के लिए काम करना है। राजद, भारत की पहली ऐसी पार्टी है जिसने संगठन में आरक्षण देना शुरू किया। कमजोर लोगों को सीने से नहीं लगाईएगा तो मजबूती नहीं आएगी।

4. कबीर और रैदास के फोटो सभी बैनरों पर लगाएं

तेजस्वी ने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को विनम्र होने की नसीहत दी। उन्होंने खजूर के बड़े पेड़ का उदाहरण भी दिया और कहा कि बड़ा होने से कुछ नहीं होता, छाया नहीं मिल जाती। विनम्र बनाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि पार्टी के पोस्टरों में कबीर और रैदास के फोटो जरूर होने चाहिए। इससे इन दोनों महापुरुषों की बातों को लोग याद रखेंगे।

5. रोजगार का वादा हम पूरा करेंगे

तेजस्वी ने कहा हमने नौकरी को लेकर लोगों से जो वादा किया है वह पूरा करेंगे। हमने बिहार में नौकरियां देनी शुरू कर दी है। कहा कि स्वास्थ्य विभाग में हम डेढ़ लाख रोजगार देंगे। तेजस्वी विधान सभा चुनाव 2020 से पहले की चुनावी सभाओं और उसके बाद की सभाओं में शायद ही कोई मंच होगा जिसमें यह कहना नहीं भूलते हैं कि रोजगार का सवाल सबसे बड़ा सवाल है। रोजगार के सवाल पर वे भाजपा को घेरते हैं। अब रोजगार देने का सवाल है। उन्होंने कहा कि इस पर काफी काम किया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा…

तेजस्वी ने अपना एजेंडा साफ कर दिया है। उनको चुनाव में जिन लोगों को – ध्रुव कुमार, राजनीतिक विश्लेषक

राजनीतिक विश्लेषक ध्रुव कुमार कहते हैं कि तेजस्वी ने अपना एजेंडा साफ कर दिया है। उनको अपनी पार्टी में आगे किस पर फोकस करना है यह स्पष्ट किया है। दलित वोट बैंक में बाधा लोजपा का वोट बैंक है। तेजस्वी ने उसका ताना-बाना बुना है कबीर और रैदास जैसे महापुरुषों को याद कर। अतिपिछड़ों पर भी उनकी नजर है। अतिपिछड़ा वोट बैंक पर जदयू कब्जा माना जाता है। राजद के जंगलराज के भय खाने वाले लोगों को तेजस्वी बताना चाहते हैं कि यह नया राजद है। जो राजद को वोट नहीं करते हैं वे राजद को वोट करें। रोजगार के सवाल के साथ ही बाकी चीजों पर भी वे ध्यान दे रहे हैं।

तेजस्वी हर तरह के राजद का पैर मजबूत करना चाहते हैं- रवि उपाध्याय, राजनीतिक विश्लेषक

राजनीतिक विश्लेषक रवि उपाध्याय कहते हैं कि अपने भाषण में तेजस्वी ने भाजपा का उदाहरण दिया। भाजपा संगठन के आधार पर सबसे मजबूत पार्टी है। बूथ और उससे ऊपर तक। तेजस्वी राजद को को उसी तरह की मजबूती देकर 2024 और 2025 का चुनाव निकालना चाहते हैं। राजनीति कैसी हो गई वे खूब जानते हैं। नीतीश को भी वे जान पहचान चुके हैं कि वे कैसे पलटी मारते रहे हैं। बेहतर प्रदर्शन के लिए ही जगदानंद सिंह को फिर से प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। जातीय समीकरण पर भी तेजस्वी की नजर है। जनता चुनाव में 30 वर्षों का हिसाब मांगेगी। वे जनता को बताने की तैयारी अभी से कर रहे हैं। चाहे वह रोजगार का मुद्दा हो या बाकी मुद्दे तेजस्वी उस पर एक्टिव हैं। तेजस्वी ने लालू की उपस्थिति में सारी बातें कहीं हैं। इसका मतलब है कि लालू की सहमति है इस सब के लिए।

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