बिहार की लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने गायों में फैली लम्पी महामारी पर नया गीत गाया है। इस गीत के सहारे उन्होंने गायों पर राजनीति करने वालों पर व्यंग्य साधा है। बता दें लम्पी बीमारी से राज्स्थान में बड़ी संख्या में गायों को मौत हुई है।
नेहा ने अपने नए गीत में गाया है- ‘फइलत लम्पी महामरिया हो…कऊनो उपइया नाही हो.. गाय गोरु जनवार के बेमरिया हो…. कऊनो उपइया नही हो… गौ सेवकन के असली इम्तिहान बा… गौशाला वीरान बा… न ओकर समाधान बा…गाय वोट बटोरे के जरिया हो.. कऊनो उपइया नाही बा…फइलत लम्पी महामरिया हो…. जय हो गाय माता के नारा लगइलन… देश भक्त बबुआ सूतल देस के जगवले अब… गिरल जा ला देश के पगड़िया हो.. कऊनो उपईया नहीं हो… फइलत लम्पी महामरिया हो… गाय माता खूंटवा अ पगहा तोड़ावे ली.. शेर बहादुर बबुआ तोहके बुलावे ले तनी फेर द त ओहरो नजरिया हो.. कऊनो उपइया नाही हो…।’
गाय, वोट और लम्पी
यह गीत नेहा सिंह राठौर ने ऐसा समय में गाया है जब प्रधानमंत्री ने अपना जन्म दिन विदेश से भारत में चीते को लाकर मनाया है। नेहा पॉलिटिकल सटायर गाने के लिए जानी जाती हैं। इसलिए वर्तमान समय में यह गीत सटायर ही है। गीत में गाय को वोट लेने का जरिया कहकर उन्होंने भाजपा पर व्यंग्य साधा है। ऐसे समय में जब गाय की बीमारी का समाधान ढूंढ़ा जाना चाहिए टीवी पर सबसे ज्यादा चर्चा चीता पर है। गीत गाने के लिए नेहा सिंह राठौर ने चरवाहा का वेश धरा है। कंधे पर गमछा और बगल में लाठी भी रखी है।
चीता आया …चीता आया…. चीता आया…
बता दें कि नेहा सिंह राठौर ने इससे ठीक दो दिन पहले चीता पर भी गीत गाया था- ‘चीता आया, चीता आया चीता आया… सगरो होर्डिंग साट दिहलें हो… ए ललना आजुके दिनवां ऐतिहासिक चीता के फीता काट दिहलें हो…. धनी-धनी भारत के धरतिया जहां साहेब अवतार लेले हो… ए ललना 56 इंच के सीना फुलाय के बेरोजगारन के तार दिहलें हो…।’
नेहा ने भोजपुरी इंडस्ट्री का दर्द रखा
नेहा भोजपुरी में गाती हैं और भोजपुरी में गाए जाने वाले फूहड़ गीतों का विरोध भी करती हैं। एक दिन पहले नेहा ने सोशल मीडिया पर एक ताजा संस्मरण लिखा है और बताया है कि ‘ एक म्यूजिक डायरेक्टर ने कहा कि – तुम्हें कोई सिंगर नहीं कहेगा। तुम्हारी पहचान एक सिंगर के रुप में तभी हो पाएगी जब तुम सईंया जी दिलवा मांगेले गमछा बिछाई के टाईप गीत गाओगी। दरअसल मैंने अपने दस गीतों का लिस्ट बनाकर प्रोफेशनल तरीके से ट्रैक के साथ गाने का प्लान किया है, इसी सिलसिले में इस महान डायरेक्टर से मेरी मुलाकात हुई।’ बता दें नेहा सिंह राठौर उस समय काफी चर्चा में आयी थीं जब उन्होंने यूपी विधान सभा चुनाव के समय ‘यूपी में का बा’ गीत गाया था। पारंपरिक गीतों को छोड़ दें तो नेहा जो गीत गाती हैं उसे खुद से ही लिखती भी हैं।







Leave a Reply