शहर में शनिवार को धूमधाम से शिल्पकार विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान जगह-जगह विश्वकर्मा पूजन के साथ प्रसाद का वितरण हुआ। शहर के व्यवसाइयों ने भी भगवान विश्वकर्मा का पूजन कर कर्मचारियों को प्रसाद बांटा। इस दौरान जिले में स्थित कई मंदिरों में भी भक्तों की भीड़-भाड़ रही। विश्वकर्मा पूजा पर सबसे ज्यादा धूम बक्सर स्थित 1320 मेगा वाट थर्मल पावर विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया।जिसकी तैयारी मजदूरों द्वारा दो दिन से किया जा रहा था।इतना ही नहीं घर-घर में सभी लोगों ने अपने वाहनों को धाेने के बाद पूजा-अर्चना की।
भारत विविधताओं और त्यौहार का धनी देश है।यहां हर तरह के पर्व को बड़े ही धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पहले के समय में मकर संक्रांति और विश्वकर्मा पूजा का तारीख नही बदलती थी लेकिन अब मकर संक्रांति पंद्रह जनवरी को अधिकांश जनमानस मनाने लगी है फिर भी पहले की तरह ही यथावत विश्वकर्मा पूजा हर वर्ष सत्रह तारीख को ही आज भी होती आ रही है।

हिंदू धर्म के अनुसार भगवान शिव ने अपने पत्नी के लिए सोने का महल भगवान विश्वकर्मा द्वारा ही बनवाया था, कृष्ण ने अपने द्वारिका नगरी इनसे ही बनवाई इस प्रकार ऐसी मान्यता है कि विश्व में जो भी यांत्रिक-अभियांत्रिकी कार्य है उन सब के स्वामी विश्वकर्मा जी है।इस क्षेत्र से जुड़े लोग विशेष रूप से आज इनकी पूजा अर्चना प्रसाद वितरण आदि करते है।बिहार झारखंड पूर्वी उत्तर प्रदेश में जो लोहार जाति से है वे इस पूजा को बहुत ही धूमधाम और श्रद्धापूर्वक मनाते है।आज हर कल कारखानों में विश्वकर्मा जी कि मूर्ति स्थापित करते है तथा सभी कल पुर्जों को मशीन आदि को अच्छे से साफ कर के उसकी पूजा अर्चना की जाती हैं।



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