नई दिल्ली. विलुप्त होने के 7 लंबे दशकों के बाद एक बार फिर चीतों की दहाड़ भारत में सुनाई देगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मध्य प्रदेश में अफ्रीका के नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कुनो नेशनल पार्क में छोड़ा. नेशनल पार्क में चीतों को छोड़ने का काम पीएम द्वारा अपने 72वें जन्मदिन के मौके पर किया गया है. चीता, जगुआर और तेंदुआ को लेकर अक्सर लोग कन्फ्यूजन में रहते हैं. लेकिन तथ्य यह है कि तीनों में अलग-अलग अपनी विशेषताएं होती हैं. मामली अंतरों की बात करें तो चीता सबसे तेज होते हैं और जगुआर सबसे बड़े होते हैं. वहीं तेंदुआ आराम से पेड़ों पर चढ़ जाता है. आइए जानते हैं आपको कन्फ्यूजन में डालने वाले इन तीन जंगली जानवरों के बारे में.वि
3 सेकेंड में 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेता है चीता
चीता बिग कैट फैमिली का सबसे सुडौल, तेज रफ्तार वाला जानवर है. यह केवल तीन सेकंड में जीरो से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेते हैं. अद्भुत चीता जमीन पर दुनिया के सबसे तेज स्तनधारी हैं. वयस्क चीता का वजन 34 किलोग्राम से 56 किलोग्राम के बीच हो सकता है. वहीं नर चीता अधिक भारी होते हैं. छोटा सिर, पतली कमर व गठीले शरीर के कारण इनकी फुर्ती देखते ही बनती है.
नेशनल ज्योग्राफिक के अनुसार गहरे पीले (पीला-भूरा या नारंगी-भूरा रंग) रंग का फर कोट काले गोल धब्बों से ढंका होता है. सबसे खास बात यह है कि एक का फर कोट दूसरे से अलग होता है. उनके पास मोटी काली धारियां भी हैं, जो उनकी आंखों के भीतरी कोनों से लेकर उनके मुंह के दोनों किनारों तक आंसू की तरह लकीरें खींचती हैं. एशियाई चीते भारत में पहले पाए जाते थे. लेकिन व्यापक शिकार और निवास स्थान के नुकसान के कारण, वे 1952 में भारत से पूरी तरह से विलुप्त हो गए थे.
जगुआर में होती है तैरने की खतरनाक क्षमता
जगुआर, तेंदुआ और चीता में जगुआर सबसे बड़े होते हैं. उन्हें बाघ और शेर के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी बिल्ली माना जाता है. जगुआर का वजन 65 से 140 किलोग्राम के बीच होता है. जगुआर का कोट हल्के पीले से लेकर लाल-पीले रंग का होता है. जिसके नीचे का भाग सफेद होता है और काले धब्बों से ढका होता है. जगुआर में तैरने की खतरनाक क्षमता होती है और ये भारत में नहीं पाए जाते हैं.
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जगुआर
पेड़ों पर चढ़ने में माहिर होते हैं तेंदुए
तेंदुए उप-सहारा अफ्रीका, पूर्वोत्तर अफ्रीका, मध्य एशिया, भारत और चीन में पाए जाते हैं. लेकिन अफ्रीका के बाहर ये जानवर बड़े पैमाने पर संकट में हैं. उनके मस्कुलर शरीर आसानी से पेड़ों पर चढ़ने में काफी मददगार होते हैं. अधिकांश तेंदुए हल्के रंग के विशिष्ट काले धब्बों के साथ होते हैं जिन्हें रोसेट कहा जाता है, क्योंकि वे गुलाब के आकार के समान होते हैं.







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