बांका में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार कई तरह की योजनाएं चला रही है। इसके तहत रेशम का धागा तैयार करने के लिए भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। केंद्रीय रेशम प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान भागलपुर की ओर से बांका की महिलाओं को धागा तैयार करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
रजौन प्रखंड के तेरह माइल चौक के पास महिलाओं का पांच दिवसीय प्रशिक्षण मंगलवार से शुरू हो गया है। बुनियादी बीज प्रगुणन व प्रशिक्षण केंद्र में सिल्क बीज से रेशम धागा तैयार किया जा रहा है। प्रशिक्षण देने पहुंचे सी. त्रिपुरारी चौधरी, फील्ड असिस्टेंट निर्मास वैध व निरंजन कुमार निराला, मास्टर टेक्नीशियन तौसीफ व मोहम्मद इम्तियाज ने बताया कि महिलाओं को रेशम का धागा तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
दरअसल, दशकों से तेरह माइल में रेशम धागा तैयार किया जा रहा है। लेकिन लागत अधिक होने के कारण धीरे-धीरे लोग अब इस काम से दूर होने लगे हैं। इसको देखते हुए अब नई तकनीक के आधार पर धागा तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान बुनकरों को हथकरधा चलाने से लेकर बुनियादी रिलिंग से धागे के प्रकार की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण लेने के बाद केंद्रीय रेशम बोर्ड वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार प्रशिक्षण प्रमाण पत्र देगी।
बेरोजगारों की आर्थिक सुधारने के लिए रेशम कीट पालन को महत्वाकांक्षी योजना बताया गया।इस दौरान प्रशिक्षण दे रहे वैज्ञानिक त्रिपुरारी चौधरी ने बताया कि कोकून के माध्यम से रेशम का धागा बुनियाद रिलिंग मशीन के द्वारा तैयार करके महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण समाप्त होने पर प्रशिक्षण ले रही महिलाओं को बुनियादी रिलिंग मशीन निशुल्क दे दी जाएगी।






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