बिहार में बारिश की कमी की वजह से कई जिलो में सूखे की स्थिति है। इसको लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को पटना में बैठक की। इस समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव आमिर सुबहानी के साथ ही कृषि सचिव अन. सरवन और आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल मौजूद रहे। लेकिन कृषि विभाग के मंत्री सुधाकर सिंह नहीं दिखे। सुधाकर सिंह ने अगस्त में हुई ऐसी ही मुख्यमंत्री की बैठक में भी उपस्थित नहीं हुए थे। हालांकि सुधाकर सिंह किसानों की इस समस्या को लेकर अलग से विभागीय बैठक करते रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के प्रभावित जिलों के प्रखंड, पंचायत और गांव स्तर तक अल्प वर्षापात के कारण उत्पन्न संभावित सुखाड़ की स्थिति का आकलन कराने को कहा। कहा कि किसानों को हर संभव मदद देने की योजना बनाएं। वैकल्पिक फसल योजना के तहत इच्छुक किसानों को जल्द से जल्द बीज उपलब्ध कराएं ताकि किसानों को कृषि कार्य में सहूलियत हो।
मुख्यमंत्री जी सक्षम प्राधिकार हैं बैठक के लिए
कृषि से जुड़ी मुख्यमंत्री की बैठक में सुधाकर सिंह की अनुपस्थिति से सवाल उठने लगे। भास्कर ने सुधाकर सिंह से बात की। उन्होंने कहा कि कृषि को लेकर बैठक होती रहती है। कुछ अधिकारियों के स्तर पर, कुछ हमारे स्तर पर और कुछ मुख्यमंत्री जी के स्तर पर। ये तो अनवरत प्रक्रिया है। आज मुख्यमंत्री जी बैठक कर रहे थे। दो दिन पहले मैंने बैठक की थी। जो लोग मेरी अनुपस्थिति की बात कर रहे हैं उनको सरकारों के कामकाज का तरीका नहीं पता होगा। मुख्यमंत्री जी सक्षम प्राधिकार हैं बैठक लेने के लिए, मैं भी सक्षम प्राधिकार हूं बैठक लेने के लिए। मेरी अनुपस्थिति में प्रधान सचिव बैठक लेते हैं।
चावल घोटाले पर कहा- मेरे साथ अन्याय हुआ, लेकिन सरकार चलाने में कोई मतभिन्नता नहीं है
बता दें कि 2013 में सुधाकर सिंह पर चावल घोटाला का आरोप नीतीश सरकार में ही लगा था। इस वजह से नीतीश कुमार से उनके राजनीतिक रिश्ते बहुत बेहतर नहीं रहे हैं। सुधाकर सिंह, राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के पुत्र हैं। जगदानंद सिंह भी नीतीश कुमार से खासे नाराज दिखते रहे हैं। वे भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। अभी वे राजद के विधायक हैं और कृषि मंत्री हैं। भास्कर ने जब सुधाकर सिंह से यह पूछा कि क्या चावल घोटाला के आरोप की वजह से आप मुख्यमंत्री की बैठक में नहीं गए? सुधाकर सिंह ने कहा कि वह राजनीतिक मसला है, पुराना मसला है हमारा। लेकिन सरकार चलाने को लेकर कोई मतभिन्नता नहीं है। मैं तो कहीं भी कहता हूं कि मेरे साथ अन्याय हुआ है। लेकिन मेरे व्यक्तिगत कारण से सरकार चलाने की प्रक्रिया बाधित नहीं होगी। मेरी उपस्थिति की जरूरत होगी तो मुख्यमंत्री की बैठक में जरूर जाएंगे।






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