बिहार विधानसभा अध्यक्ष पद का मामला गरमा गया है। एक तरफ निवर्तमान विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा ने नियमों का हवाला देते हुए इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है तो वहीं डिप्टी स्पीकर ने कहा है कि विजय सिन्हा स्वयं नैतिकता का पालन नहीं कर रहे हैं।
मंगलवार को निवर्तमान विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मैं इस्तीफा नहीं दूंगा। सदन में बिना किसी भय और पक्षपात के अपनी बात रखूंगा। सत्तारूढ़ दल की तरफ से जो अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है, उसे विधानसभा के अध्यक्ष ने नकार दिया है।
सदन में नियमानुकूल काम होने की कही बात
विजय सिन्हा ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण कार्य किया। 20 महीने के कार्यकाल में कई उद्घाटन हुए। पीएम मोदी भी विधानसभा आए। कल सदन की अध्यक्षता पर विजय सिन्हा ने कहा कि नियमानुकूल सदन में काम होगा। सरकारी कार्य पहले होता है, इसलिए पहले सरकारी कार्य होगा। इसके बाद कोई कार्य लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मैं लोकतंत्र में अटूट आस्था रखता हूं। अध्यक्ष नियमों और परंपराओं का संरक्षक है। जबतक मैं हूं, लोकतंत्र को सुरक्षित रखना मेरा काम है। मेरे ऊपर जब अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, मैने इसे अपने ऊपर नहीं, सदन के ऊपर अविश्वास की बात देखी।
उन्होंने कहा कि इस नोटिस को अस्वीकृत करना मेरी जिम्मेदारी है। अविश्वास प्रस्ताव नियमानुसार नही है। कुछ सदस्यों ने बिना तथ्य के तानाशाह की तरह बताया गया। यह परंपरा और मेरे लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा।
इस्तीफा नहीं देने को निंदनीय बताया
इस मामले में डिप्टी स्पीकर और स्पीकर आमने सामने हो गए हैं। डिप्टी स्पीकर महेश्वर हजारी ने कहा कि पूरा आंकड़ा सत्ता पक्ष के साथ है। सदन आंकड़ों के साथ ही चलता है। आंकड़ा नही रहने और अविश्वास प्रस्ताव के बाद भी इस्तीफा नहीं देना निंदनीय है। विजय सिन्हा हमेशा मूल्यों और नियमों की बात करते रहे हैं। अब जब नियमों की बारी आई तो इस्तीफा नहीं दे रहे। यह गलत परम्परा की शुरुआत हो रही है।
सांवैधानिक संकट की ओर विधानसभा, हो सकती है अनहोनी
पूरे घटनाक्रम पर वरिष्ठ पत्रकार अरुण पांडे ने कहा है कि यह सांवैधानिक संकट हो गया है। स्पीकर विजय सिन्हा ने नियम के मुताबिक इस पद से इस्तीफा नहीं देने कहा है, वह सही है। नियम के मुताबिक जब विधानसभा का सत्र बुलाया जाता है तो उसमें एजेंडा भी होता है। इस विधानसभा सत्र को बुलाने के पीछे मात्र एक एजेंडा दिया गया था, विश्वास मत हासिल करने का। ऐसे में नियम के मुताबिक सिर्फ इसी एजेंडे पर चर्चा होगी। लेकिन जिस तरह सत्तारूढ़ दल ने विजय सिन्हा के खिलाफ मोर्चा खोला है, इसमें कोई अनहोनी होने की बात है। क्योंकि जब विधान सभा सचिवालय ने विधायकों के अविश्वास प्रस्ताव को खारिज दिया है, तो ऐसे में जब सदन की अगली बैठक होगी, उसमें अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होनी चाहिए, जो नियम है।







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