बीपीएससी पीटी परीक्षा दो पाली यानी दो दिन में कराने और परसेंटाइल सिस्टम के विरोध में अभ्यर्थियों का गुस्सा लगातार कायम है। सोमवार को ट्वीटर पर #BPSC_PT_IN_ONE_SHIFT विरोध में अभियान चलाया। राष्ट्रीय छात्र एकता मंच के अध्यक्ष छात्र नेता दिलीप कुमार ने कहा है कि लगभग एक लाख साठ हजार से अधिक ट्वीट किए गए। आयोग को मेल भी भेजे गए। अब आगे के आंदोलन की रुपरेखा भी तैयार कर ली गई है। बिहार लोक सेवा आयोग के बेली रोड स्थित कार्यालय में जाकर चेयरमैन से आग्रह करेगा। आग्रह नहीं माना गया तो विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।
किसी भी लोक सेवा आयोग में परसेंटाइल सिस्टम लागू नहीं, यह घातक है
दिलीप कुमार ने भास्कर से बातचीत में परसेंटाइल सिस्टम की खामियां गिनायीं और कहा कि किसी भी लोक सेवा आयोग में यह सिस्टम लागू नहीं है और न ही यूपीएससी में यह लागू है। कहा कि समस्त अभ्यर्थियों की ये मांग है कि बीपीएससी पीटी परीक्षा सिर्फ एक दिन और एक ही पाली मे आयोजित होनी चाहिए। परसेंटाइल सिस्टम घातक है। इसमें अभ्यर्थियों के वास्तविक अंक पर मूल्यांकन नही होगा बल्कि आभासी अंक पर मूल्यांकन होगा। दो दिन परीक्षा होने से समस्या यह है कि दोनों के प्रश्न पत्र का स्तर अलग-अलग होगा। खेल के बीच मे नियम नही बदले जाते। जब 8 मई को एक पाली में छह लाख से अधिक की परीक्षा ली गई तो फिर से क्यों नहीं ली जा सकती।

दो दिन परीक्षा होने से समस्या यह है कि दोनों के प्रश्न पत्र का स्तर अलग-अलग होगा।
अचानक से नियम नहीं बदल सकते
उन्होंने यह भी कहा कि एक बार पीटी परीक्षा हो चुकी है लेकिन पेपर लीक के कारण रद्द की गई। अचानक से नियम बदले नहीं जा सकते। कोई भी नया नियम लागू करने से पहले उसे राज्य कैबिनेट से पारित कराना होता है। परीक्षा की तिथि भी यूपीएससी मुख्य परीक्षा के आसपास रखी गई है। इससे अभ्यर्थियों को काफी परेशानी होगी।
आंदोलन करके मांग मनवाएंगे
दिलीप कुमार ने कहा कि अगर इस फैसले को बिहार लोक सेवा आयोग वापस नही लेता है तो 26 अगस्त को आयोग कार्यालय जाकर चेयरमैन से आग्रह करेंगे और मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन किया जाएगा। बता दें कि 20 और 22 सितंबर को निर्धारित पीटी परीक्षा वही परीक्षा है जो 8 मई को ली गई थी। उसमें प्रश्न पत्र लीक होने की वजह से सभी सेंटर्स की परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इसकी जांच अभी ईओयू की टीम कर रही है। कई गिरफ्तारियां भी इस मामले में हो चुकी हैं। इतनी अधिक संख्या में अभ्यर्थी होने की वजह से आयोग को सेंटर्स खोजने में काफी दिक्कत हुई थी। आयोग का तर्क है कि परीक्षा सही तरीके से संचालित की जाए इसलिए दो दिनों में लेना निर्धारित किया गया है।



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