जिले में हाथी पांव यानी फाइलेरिया से 30 हजार से अधिक लाेग बीमार हैं। उनसे आस-पड़ाेस में भी बीमारी का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग के पास सिर्फ 3005 लोगों के फाइलेरिया संक्रमित होने का रिकॉर्ड है। हालांकि, हर साल एक बार डीईसी एलबेंडाजोल की गोली खिलाने का पखवाड़ा चलाया जाता है। पर, इसमें भी मरीजों की संख्या का सटीक पता नहीं चल पाता है।:
2020 से पहले विभाग के पास मात्र 508 लोगों के फाइलेरिया ग्रसित होने का आंकड़ा था। 2021 और 2022 में बड़ी संख्या में पीड़ित अस्पताल पहुंचने लगे। तब आंकड़ा 3005 पर पहुंचा। सरकार ने केयर इंडिया के टेक्निकल सपोर्ट से हाथी पांव काे लेकर जागरूकता और बचाव अभियान का निर्णय लिया। तब विभाग के पास मात्र 3005 लोगों का आंकड़ा मिला। इसके बाद डीडीसी ने जीविका के माध्यम से घर-घर जाकर लाइन लिस्टिंग शुरू कराई।
अभी तक वर्षों से हाथी पांव से ग्रसित 15 हजार से अधिक लोगों काे चिह्नित किया जा चुका है। जिस गति से संक्रमित मिल रहे हैं, उससे यह आंकड़ा 30 हजार से अधिक पहुंच सकता है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट जारी होने से पहले ही दैनिक भास्कर ने प्रभावित गांवों में पहुंच कर जमीनी हकीकत परखी। मड़वन के रूपवाड़ा में भास्कर टीम ने शिव मंदिर के पास वार्ड-9 में लोगों से बात की। पता चला कि एक-एक घर में 5-5 लाेग फाइलेरिया ग्रसित हैं। इसी वार्ड के उमेश मिश्रा के परिवार में पांच लाेग फाइलेरिया पीड़ित हैं। इस टाेले में संक्रमण तेजी से फैल रहा है।
पीड़ित की जुबानी, मुजफ्फरपुर जिले में बीमारी फैलने की कहानी
14 वर्ष की उम्र में सुरेश को हाथ से शुरू हुई बीमारी हाथी पांव में बदली
केस- 1
सुरेश मिश्रा बताते हैं- वह 14 साल के थे। बीमारी हाथ से शुरू हुई। हाथ चकत्ता जैसा हाेकर लाल हो जाता था। तेज बुखार हो जाता। मां घरेलू उपचार कर देती थी। अकवन के पत्ते काे तेल लगा आग पर सेंक देती और लाल चकत्ते वाले स्थान पर साट देती थी। यह धीरे-धीरे ठीक होने लगता था। 18 साल का होने पर हाइड्रोसील फूलने लगा। यह इतना बड़ा हो गया कि उठना-बैठना और चलना तक मुश्किल हो गया। 30 साल का होने पर हाइड्रोसील के साथ पैर भी फूलने लगा।
हाथी पांव के कारण चलना तो दूर बिस्तर से उठ भी नहीं पाते हैं उमेश
केस -2
उमेश मिश्र 10 साल से हाथी पांव से पीड़ित हैं। चलना-फिरना काे कौन पूछे, बिछावन से उठना या बैठना भी मुश्किल है। गलती से भी इसमें खरोंच लग जाए, ताे घाव हो जाता है। पानी गिरने के साथ घाव में कीड़ा भी पड़ जाता है। एक बार घाव हो गया था, ताे दाे साल तक ठीक नहीं हुअा। काफी दवा-इलाज के बाद घाव ठीक होने के बाद पांव और फूलता गया। पैर करीब 20 किलो वजन के बराबर फूल गया है। शादी के बाद हाथी पांव फूलने लगा। काफी इलाज के बाद भी ठीक नहीं हो सका।
फाइलेरिया 1-8 स्टेज में होती है। 5 स्टेज से अधिक वालाें काे सेल्फ केयर किट दिया जाता है। करीब 1000 किट वितरण हुआ। साल में एक बार सर्वजन दवा सेवन के तहत डीईसी एलबेंडाजोल खिलाई जाती है। 10 हजार से अधिक मरीज होने का अनुमान है। हालांकि, आंकड़ा बढ़ भी सकता है।
-डाॅ. सतीश कुमार, जिला फाइलेरिया पदाधिकारी।







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