जब से पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के अकूत संपत्ति का मामला सामने आया है और जदयू ने उनपर सवाल खड़ा किया, उसके बाद से बिहार के राजननीतिक गलियारे में हलचल मची हुई है। बात इतनी बढ़ गई है कि NDA गठबंधन के तहत चल रही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली सरकार गिरने और गिराने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। बिहार में NDA गठगंधन टूटने की बात हो रही है। इन सब बातों के बीच में सोमवार को पटना में प्रेस कांफ्रेंस कर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व जमुई के सांसद चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक बार फिर से घेरने की कोशिश की है।
चिराग ने आरोप लगाया कि बिहार में बहुत सारे ज्वलंत मुद्दे हैं। जिन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नीतीश कुमार किसी भी गठबंधन में रहें। NDA या महागठबंधन में, वो सिर्फ मुख्यमंत्री पद के लिए सोचते हैं। ये सत्ता और कुर्सी के लोभ में है। कोई सिद्धांत और कोई एजेंडा इनके लिए या इनकी पार्टी के लिए कोई मायने नहीं रखती है। पिछले 8 साल में तीसरी बार ये गठबंधन बदलने की सोच रख रहे हैं।
क्या है नीतीश मॉडल बिहार में?
राज्य के अंदर जहरीली शराब बन रही है। आए दिन जहरीली शराब पीकर लोगों की मौत हो रही। अभी सारण जिले में ही कई लोग मर गए। आए दिन राज्य में हत्याएं हो रही है। इन सब पर रोक लगाने की बात कौन सोच रहा है? इसके बाद मुख्यमंत्री बात करते हैं चिराग मॉडल की? तो हमारा मॉडल तो विकास का मॉडल है। हम बिहार फर्स्ट और बिहारी फर्स्ट की बात करते हैं। जनभावनाओं का प्रतीक है हमारा मॉडल।
सवालिया लहजे में चिराग ने पूछा कि वो बताएं न क्या है नीतीश मॉडल बिहार में? बाढ़ में लोगों को डूबने देना, सुखाड़ में किसानों को मरने देना, बेरोजगारी में युवाओं का पलायन होने देना, अस्पतालों की हालत ऐसी कि मुख्यमंत्री अपने आंखों का इलाज कराने दिल्ली जाते हैं। आए दिन अपराध बढ़ रहे हैं। क्या यही है नीतीश मॉडल?
क्या है विकास की रेखा?
चिराग ने बिहार सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि बेरोजगारी को चरम सीमा पर ले जाना ही क्या नीतीश कुमार की खींची हुई विकास की रेखा है? अपराध को चरम सीमा पर ले जाना ही क्या विकास की रेखा है? ये बोलते हैं कि कोई हमसे बड़ा विकास की रेखा खींच कर दिखाए? पहले तो इन्हें बताना चाहिए कि इन्होंने कैसी विकास की रेखा खींची है?
जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा पर भी सवाल खड़ा करते हुए चिराग ने कहा कि 2020 के विधान सभा चुनाव से पहले क्या उन्हें चिराग मॉडल के बारे में नहीं पता था। जनता दल यूनाइटेड अब जनता दल डिवाइडेड बन गया है। मुख्यमंत्री को चिराग मॉडल से नहीं बल्कि उनको अपने घर के विनाश के मॉडल वाले लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।
जिसका डर दिखाया, उसके साथ पलटी मारने की तैयारी
भाजपा के साथ मिलकर चुनाव जीतने के लिए जंगल राज का डर जनता को याद दिलाते थे। अब आज क्या करने जा रहें हैं? क्या नीतीश कुमार 2015 के विधानसभा चुनाव में जंगल राज को भूल गए थे? 2017 में फिर से भ्रष्टाचार और जीरो टॉलरेंस की बात कह कर अलग हो गए। बात जहां तक आरसीपी सिंह की है तो आज जदयू अपने नेता पर भ्रष्टाचार के सवाल खड़ा कर रही है। पर बात यह है कि क्या नीतीश कुमार और उनकी पार्टी भूल गई थी कि 2013 से वो किस पार्टी के नेता थे? अपने ही पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। ये आश्चर्य वाली बात नहीं है। क्योंकि, इतिहास देखेंगे तो ऐसा पहले से होता आ रहा है। पहले जॉर्ज फर्नांडिस फिर शरद यादव के साथ भी ऐसा हुआ। पहले इनका अपमान किया फिर पार्टी से बाहर किया। अब आरसीपी सिंह के साथ ऐसा कर रहे हैं।



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