औरंगाबाद सावन की पहली सोमवारी पर वैसे तो जिले के सभी शिवालय में श्रद्धालुओं की भीड़ बाबा भोलेनाथ की दर्शन के लिए उमड़ी है। लेकिन जिले के गोह प्रखंड के देवकुंड स्थित बाबा दूधेश्वरनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ कुछ अलग ही है। यहां अहले सुबह से ही बाबा भोलेनाथ के दूधाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी है। हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा इलाका गुंजायमान हो गया है।
श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा है। भीड़ को देखते हुए ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु दूधेश्वरनाथ का दूधाभिषेक के साथ दर्शन-पूजन करेंगे। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु सबसे पहले सहस्त्रधारा कुंड में स्नान करते हैं। इसके बाद बाबा दूधेश्वरनाथ का दर्शन करते हैं।

यह चमत्कारी रत्न 24 घंटे में अपना असर दिखाता है।
दूधेश्वरनाथ मंदिर में नीलम पत्थर का है शिवलिंग
गोह के देवकुंड स्थित बाबा दूधेश्वरनाथ के मंदिर में नीलम पत्थर का शिवलिंग स्थापित है। जो काफी बेशकीमती होता है। इस मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है। इसकी चर्चा शिव पुराण में भी है। देवकुंड मठ के मठाधीश कन्हैयानंद पूरी के अनुसार नीलम काफी महंगा पत्थर है और शक्तिशाली भी होता है। यह नीले रंग का पारदर्शी पत्थर होता है।
यह शनि का रत्न है। यह चमत्कारी रत्न 24 घंटे में अपना असर दिखाता है। बनाने और बिगाड़ने दोनों का शक्ति इसके अंदर है, लेकिन नीलम पत्थर के बने बाबा दूधेश्वरनाथ की शिवलंग की मान्यता है कि इसके दर्शन से सिर्फ अच्छा प्रभाव पड़ता है। बाबा दूधेश्वरनाथ के दूध अभिषेक और जलाभिषेक से जिंदगी की हर पीड़ा दूर होती है। रोग और गरीबी से छूटकारा मिलता है। घर में धन, धान्य और हर तरह की समृद्धि आती है। इसीलिए हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं।



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