सिकंदरपुर मन की 100 एकड़ से अधिक जमीन पर अतिक्रमण मामले में विभाग ने बहाना शुरू कर दिया है। मन की जमीन के पुराने और नए खतियान का मूल कागजात पूरी तरह से बर्बाद हाे गया है। इस कारण सिकंदरपुर मन की जमीन का कैडेस्ट्रल सर्वे खतियान व रिविजनल सर्वे खतियान का मिलान हाेना मुश्किल हाे गया है।
अपर समाहर्ता राजस्व राजेश कुमार ने मुशहरी सीओ से ब्रह्मपुरा स्थित सिकंदरपुर मन की जमीन का कैडेस्ट्रल सर्वे खतियान व रिविजनल सर्वे खतियान की रिपोर्ट मंतव्य के साथ मांगा है। उन्होंने दाेनाें खतियान के क्षतिग्रस्त हाेने के कारण अब पटना से इसके दाेनाें खतियान की खाेज कर उसका मिलान कर खाता, खेसरा व रकबा के साथ पूरी रिपोर्ट अपने मंतव्य के साथ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। आदेश में बताया है कि 20 सितंबर 2019 से अबतक 10 बार रिमाइंडर देने के बाद भी सिकंदरपुर मन की जमीन का कैडेस्ट्रल सर्वे खतियान व रिविजनल सर्वे खतियान का मिलान कर रिपोर्ट नहीं दी गई है।
एक दशक से मन की जमीन की वास्तविक स्थिति का पता नहीं
शहर के ब्रह्मपुरा स्थित सिकंदरपुर मन की जमीन का अतिक्रमण कर जहां लगातार मकानों का निर्माण हाे रहा है। वहीं, एक दशक से उसकी वास्तविक स्थिति की जानकारी प्रशासन काे नहीं मिल पा रही है। अब सिकंदरपुर मन के किनारे स्मार्ट सिटी से बन रहे रिवर फ्रंट के कारण उसकी जमीन की खोजबीन शुरू हाे गई है।






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