बक्सर में महिलाएं अब ई रिक्शा चला रही है। नगर परिषद की इस अनोखी पहल की खूब सराहना हो रही है। जब सुबह होते ही कचरा उठाव के लिए शहर के विभिन्न वार्डों के लिए महिलाएं नगर परिषद कार्यालय से ई -रिक्शा लेकर निकलती है तो लोग अपनी चेहरे पर एक हल्की मुस्कान लेकर इन्हें आश्चर्य भरी नजरों से देखते हैं। इससे शहरी गरीब महिलाओं को सबल व सशक्त बनाने के लिए योजना कारगर साबित होने की बात कही जा रही है। ये वो महिलाएं है जो अभी तक साइकिल तक नहीं चला पाई। घर के अंदर काम काज कर पति के ऊपर आश्रित थी। लेकिन अब इन्हें ई रिक्शा से कचरा उठाने का 200 रुपये रोज मिल रहे हैं। इससे ये घर चलाने में अपनी पति की सहायता कर रही है।
बताया गया कि नगर परिषद की 15 ई-रिक्शा चलाने वाली महिलाएं दीन दयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन द्वारा संचालित आजीविका स्वयं सहायता समूह की है। इन्हें स्वरा सारथी भी कहा जा रहा है। बताया गया कि बक्सर नगर परिषद में शहर की सफाई के लिए 30 ई-रिक्शा खरीदा गया था। लेकिन 10-11 रिक्शा ही शहर में कचरा उठाने का कार्य करती थी। अन्य चालक के अभाव में कार्यालय परिसर में पड़ी हुई थी।
ई-रिक्शा चलाने का ट्रेनिंग दिया गया
नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकरी प्रेम स्वरूपम द्वारा महिला दिवस पर नगर की महिलाओं को स्वावलंबी व सशक्त बनाने के लिए ई-रिक्शा चलाने का ट्रेंनिग देने का निर्णय लिया गया। मिशन के CMMU सन्तोष राय ने बताया कि पहले 3 महिलाएं ही इस काम के लिए तैयार हुई। इन्हें ट्रेनिंग देने का कार्य शुरू किया गया। लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे समूह की 15 महिलाएं तैयार हो गई। इनको रैन बसेरा के मैनेजर दिनेश कुमार द्वारा ट्रेनिंग दिया जाने लगा। कार्यपालक पदाधिकारी प्रेम स्वरूपम ने कहा कि महिलाएं अब स्वयं रोजगार के प्रति जागरूक हो रही हैं। ई रिक्शा चलाकर महिलाएं खुद आत्मनिर्भर बनेंगी। इनसे अन्य महिलाएं भी सीख लेंगी।

कूड़ा-करकट संग्रह कर कचरा डंपिग जोन में ले जा रही
ये महिलाएं आवंटित वार्ड में से ई रिक्शा के माध्यम से कूड़ा-करकट संग्रह कर कचरा डंपिग जोन में ले जाने का काम कर रही है। हालांकि, अभी ये पूरी तरह से ट्रेंड नहीं हो पाई इनको आगे और ट्रेंड किया जा रहा है। शहर में कचरा उठाने से पहले बक्सर के किला मैदान में इन्हें 15 दिन की ट्रेनिंग दी गई है। इससे महिलाओं में जिले के एक और क्षेत्र में रोजगार की उम्मीद जगी है।
महिला-पुरुष के बराबर काम करती है
इमिरती देवी का कहना है कि महिलाएं पुरुषों से तो न पहले कम थी और न ही अब हैं। महिला-पुरुष के बराबर काम करती है। यहीं सोच कर ई-रिक्शा चलाने के लिए पहले आगे आने का निर्णय लिया। अब पति-पत्नी दोनों काम करेंगे तो परिवार का गुजारा अच्छे से हो सकेगा। जब महिलाएं बैंक व अन्य कार्यालयों में कंप्यूटर चला सकती हैं तो सड़क पर ई-रिक्शा या ऑटो चलाने में कोई शर्म महसूस नहीं होनी चाहिए। दिव्यांग सिल्की कुमार ने कहा कि जब से ई-रिक्शा चलाने का कार्य कर रही है, तब से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है।
महिलााओं के लिए प्रेरणा बन रही
अपने कार्य के प्रति लगन एवं कड़ी मेहनत से वह अन्य अपनी जैसी महिलााओं के लिए प्रेरणा बन रही है। बढ़ती आय को देखते हुए उनका अपने छोटे छोटे सपनों को पूरा करने की उम्मीद जगी है। ई-रिक्शा चलाने वाली महिलाओं में इमरती देवी, शांति देवी, बबीता देवी, पिंकी कुमारी, ललिता देवी, लक्ष्मी देवी, रिंकी देवी, माला देवी, संगीता कुमारी, सीमा देवी, सोना, मति देवी, निशा देवी, उर्मिला देवी आदि है।






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