मेरे मां-बाप शराब पीते थे…मेरे घर में शराब बेचा जाता था…लेकिन मैं शराब को छूता तक नहीं हूं। जी हां ये कहना है बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी का। जीतनराम मांझी ने स्वीकार किया कि उनके घर में शराब का व्यवसाय होता था और उनके माता-पिता शराब पीते थे। घर में शराब पीने और पिलाने का माहौल था। लेकिन, मैं शराब तक छूता नहीं था। वहां कोई शराबबंदी नहीं थी। लेकिन, मेरी इच्छा शराब पीने की नही हुई तो मैंने शराब नहीं पिया। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने ये बातें HAM की किशनगंज में हो रही राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में कही। जब उनसे ये पुछा गया कि शराबबंदी बिहार में सफल है या नही।
हमारे घर में शराब बनती थी – मांझी
हम मानते हैं कि शराबबंदी बहुत अच्छी चीज है। बिहार सरकार ने बिहार ने विधानसभा, विधान परिषद में इसको पास किया है। हम 78 वर्ष के हो चुके हैं। हमारे घर में शराब बनती थी और शराब बेची जाती थी। हमारे मां-पिता जी दोनों शराब पीते थे। लेकिन हमने अपने होठों तक शराब नहीं लाया। उस समय शराबबंदी नहीं थी। अवेरनेस करने की जरूरत है। जो कानून बना है उसमें बहुत दोष नहीं है। लेकिन, इस कानून का इंप्लीमेंटेशन ऐसा हो रहा है कि पुलिस तबके के लोग करोड़पति हो रहे है और गरीब-बेगुनाह लोग जेल जा रहे हैं।
किसी को फंसाना है तो उसके घर मे शराब रखकर फ़ंसा दे रहे और उसको जेल भिजवा देते हैं। इसके इम्पीमेंटेशन में गड़बड़ी हो रही है। हम बार-बार नीतीश कुमार से इस बात को कहते हैं। इसकी समीक्षा होती रही है।
जातीय गणना के का श्रेय नीतीश कुमार को दिया मांझी ने
आज किशनगंज में HAM पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक हो रही है। इस बैठक में अधिकारिक रुप से जीतनराम मांझी के पुत्र और बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाएगा। हालांकि इसकी घोषणा पहले ही किया जा चुका है।
इस बैठक में मीडिया से बात करते हुए जीतनराम मांझी ने जातीय जनगणना कराने का श्रेय तेजस्वी यादव के लेने पर कहा कि कोई कैसे जातीय गणना का श्रेय ले सकता है। इसको लेकर CM नीतीश कुमार लगातार प्रयासरत थे। वैसे भी जबतक राज्यसरकार नही चाहेगी तबतक जातीय जनगणना नही हो सकता है। CM नीतीश कुमार इसके लिए काफी मेहनत की है। जब ये गणना हो जाएगा तो साफ स्पष्ट हो जाएगा किसकी कितनी संख्या है और इसी के आधार पर लोगों की हिस्सेदारी तय होगी। सरकार उनके लिए योजना भी लाएगी।







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