जमुई के सोनो प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत लोहा पंचायत के 4 गांव में भूजल में फ्लोराइड की अधिक मात्रा होने की वजह से भूजल का उपयोग मानव जीवन योग्य नहीं है। इसके कारण सरकार ने गांव के हर नल पर लाल निशान लगा दिया है। दशकों से यह समस्या लोहा पंचायत के 4 गांव को प्रभावित करती रही है। खास बात है कि इसी प्रखंड के करमटिया इन दिनों चर्चा में है। क्योंकि यहां सोने का विशाल भंडार मिला है।
इसकी वजह से गांव के लोग आंशिक या पूर्ण रूप से दिव्यांगता के शिकार हो रहे हैं। 70 प्रतिशत लोगों के दांतों पर पीलापन और कालापन का सिर्फ लेप ही नहीं चढ़ा है बल्कि जवानी में ही बुढ़ापे का असर भी दिखता है।
इसके अलावा जोड़ों में दर्द, हड्डियों का टेढ़ापन, बौनापन, मांसपेशियों में अकड़न, जी मिचलाना जैसी परेशानियों से लोगों को जूझना पड़ा। गांव में रहने वाले बबलू साह ,मिथिलेश साह, पवन साह व डब्लू साह की 25 से 30 साल की उम्र में हड्डियां वृद्ध की तरह दिखती है। 50 साल की माला देवी निशक्त हो चुकी है। 48 साल की उम्र में गीता देवी को नित्य क्रिया के लिए दूसरे पर आश्रित रहना पड़ता है। 32 साल की बबीता आठ साल की दिखती है।


दांतों पर पीलापन और कालापन यहां आम बात है।
इस मामले में मुखिया जमादार सिंह बताते हैं कि पानी की समस्या का मामला 2004-2005 पता चला था। टीमें आई जांच की गई पता चला कि फ्लोराइड की मात्रा पानी मे ज्यादा है। लगभग 4 वर्ष बाद सरकार ने एक प्रयास किया फ्लोराइड युक्त पानी के लिए एक यूनिट पानी की व्यवस्था की गई। लेकिन विरल आबादी होने के कारण एक यूनिट से काम नहीं हो पाया। मुखिया बताते हैं कि गांव की आबादी 500 के करीब है जिसमें 90% लोग फ्लोराइड बीमारी से प्रभावित है।


यहां लोगों पर जवानी में ही बुढ़ापे का असर भी दिखता है।
जमुई जिला पदाधिकारी अवनीश कुमार सिंह इस समस्या पर संज्ञान लेते हुए फ्लोराइड से प्रभावित गांव में जल शोधन संयंत्र लगाने का काम पीएचडी विभाग को दिया गया था। जिलाधिकारी के अनुशंसा के बाद पीएचईडी विभाग से मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद जिला पदाधिकारी के द्वारा फ्लोरोसिस से प्रभावित गांव करकुट्टा, गुबरो, सलैया और हरिहरपुर में जल शोधन संयंत्र लगाने का निर्देश दिया गया है।




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