नगर निगम क्षेत्र के बाहर भी बन रहे नए भवन, अपार्टमेंट या बड़े कंस्ट्रक्शन पर लाेगाें काे एक नया लेबर टैक्स लगेगा। श्रम विभाग ने इसको लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग की नजर बड़े कंस्ट्रक्शन पर है, क्योंकि इससे बड़ी आय हाेगी। 10 लाख या इससे ऊपर की बिल्डिंग या अन्य तरह के निर्माण कार्य पर लागत का एक प्रतिशत श्रम सेस देना हाेगा। वैसे ताे शहर सहित पूरे जिले में कार्रवाई के लिए लक्ष्य निर्धारित कर बकाएदाराें का सर्वे किया जा रहा है। लेकिन, पहले चरण में विभाग की नजर शहर से सटे हाईवे किनारे बने बड़े बिल्डिंग व अपार्टमेंट पर है।
विभाग की टीम ने मुजफ्फरपुर-पटना राेड में बिल्डिंग की जांच शुरू कर दी है। मधाैल के आसपास की 7 कंपनियाें एवं लाेगाें काे नोटिस भी किया गया है। विभाग की मानें ताे शुरुआत में मुजफ्फरपुर-पटना, मुजफ्फरपुर-समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर-दरभंगा राेड में सभी हाईवे किनारे की बड़ी बिल्डिंग की जांच की जाएगी।
दरअसल, लाेगाें काे इस उपकर के बारे में जानकारी भी नहीं है। इसलिए नगर निगम क्षेत्र काे छाेड़ दें ताे आसपास के इलाके के अधिकतर लाेग लेबर सेस नहीं दिए हैं। एेसे में विभाग ने बड़े कंस्ट्रक्शन काे टारगेट पर लिया है।
श्रम विभाग पहले नाेटिस देगा, फिर 15 से 20 दिनाें के अंदर भुगतान नहीं हाेने पर असेसमेंट कर कार्रवाई करेगा
श्रम विभाग सेस नहीं देने वाले लाेगाें काे पहले नाेटिस देगा। इसके बाद भी भुगतान नहीं हुआ ताे 15-20 दिनाें के अंदर कंस्ट्रक्शन का असेसमेंट कर विभाग वसूली के लिए जिला प्रशासन काे कार्रवाई के लिए लिखेगा। देरी पर ब्याज के साथ प्राथमिकी दर्ज तक कराई जाएगी। श्रम सेस लेने का नियम बिहार में 2005 से ही प्रभावी है। लेकिन, वर्षाें तक श्रम विभाग सुस्त पड़ा था।
अब विभाग ने इसकी वसूली के लिए श्रम करने का निर्देश दिया है। 1 कराेड़ की बिल्डिंग पर एक प्रतिशत सेस का मतलब है एक लाख रुपए। निगम व बिजली विभाग से भी सहयाेग लेकर विभाग बड़े निर्माण की जानकारी लेकर वसूली करेगा। कंस्ट्रक्शन वर्कर्स लेबर सेस फंड में जमा यह राशि श्रमिकाें के वेलफेयर और उनके लिए चलाई जाने वाली याेजनाओं पर दी जाएगी।
’10 लाख या ऊपर की लागत से बने कंस्ट्रक्शन या बिल्डिंग का सर्वे किया जा रहा है। इन्हें लेबर सेस देना हाेगा। निगम भी 2018 के बाद अपने क्षेत्र में यह ले रहा है। लेकिन, अब विभाग ने सेस नहीं देने वाले भवनाें का सर्वे कर सेस जमा कराने का निर्णय लिया है। वर्तमान में बड़े कंस्ट्रक्शन हाईवे के पास हाे रहे हैं। पहले चरण में इसे टारगेट किया गया है। नहीं देने पर नियम के तहत कार्रवाई हाेगी।’
-रणवीर रंजन, श्रम अधीक्षक, श्रम विभाग







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