CM नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा उद्भव प्रोजेक्ट अब जमीन पर उतरने लगा है। इसके तहत गंगा का पानी पाइपलाइन के माध्यम से नवादा के नारदीगंज तक पहुंच गया है। शनिवार को नारदीगंज/गिरियक में इसका ट्रायल किया गया जो पूरी तरह सफल रहा।
कंपनी के अधिकारी इस मामले पर फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। वे इसे इंटरनल ट्रायल बता रहे हैं। इस ट्रायल रन के माध्यम से ये समझने की कोशिश की गई है कि अभी तक बिछाई गई पाइप लाइन में किस प्रकार की कमियां है। हालांकि इस ट्रायल रन को सफल बताया जा रहा है।
दूसरे चरण में नालंदा से गया तक बिछाई गई पाइपलाइन का परीक्षण किया जाएगा। 3000 करोड़ के इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य पाइप लाइन के माध्यम से गंगा के पानी को पटना के हाथीदह से गया के फल्गू नदी तक पहुंचाना है।

इसे 2051 तक की आबादी को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसके माध्यम से नालंदा के राजगीर सहित गया और नवादा जिले के लगभग 12 लाख की आबादी को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराया जाएगा। इसके साथ ही इसके माध्यम से नालंदा विश्वविद्यालय, बिहार पुलिस एकेडमी, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम सह स्पोर्ट्स एकेडमी, फिल्म सिटी, सीआरपीएफ कैंप में भी पेयजल की आपूर्ति होगी।
घोड़ा कटोरा झील के पास जल संरक्षण के लिए बन रहा डैम
घोड़ाकटोरा झील के पास 354 एकड़ में जल भंडारण के लिए डैम का निर्माण किया जा रहा है । इस एरिया में रिजर्वायर एंड ड्रेन, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, वाटर सर्च टैंक, बांध के समीप बोल्डर पीचिंग, टो ग्रैंड, रिक रौक सहित अन्य साइट पर काम चल रहा है। इसे पूरा होने में अभी भी 3 से 4 महीने का समय लग सकता है।


घोड़ा-कटोरा झील के बगल में बन रहा डैम।
190 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई गई
3000 करोड़ रुपए की लागत से इस योजना में पटना जिले के मोकामा के हाथीदह से गंगा नदी का पानी सरमेरा, बरबीघा होते हुए राजगीर अनुमंडल क्षेत्र के गिरियक प्रखंड के घोड़ाकटोरा झील में पानी को गिराया जाएगा। यहां से पानी को गया जिले के फल्गु नदी तक ले जाया जायेगा। इसके लिए मरांची से गया तक सड़क के किनारे 190 किमी लंबी पाइपलाइन बिछायी जा रही है। इस पूरी परियोजना में 400 से भी अधिक मजदूर काम पर लगे हैं।

एक नजर में गंगा जलापूर्ति योजना
पहले चरण में हाथीदह के निकट से गंगाजल को मरांची-सरमेरा-बरबीघा-गिरियक फिर गिरियक-राजगीर, गिरियक-वानगंगा-तपोवन-जेठियन-बिकैयपुर-दशरथ मांझी पास, वजीरगंज-गया के रास्ते पाइपलाइन के माध्यम से गया-बोधगया और राजगीर के लिए पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।




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