अब बिहार में संविदा पर पुलिस कर्मियों की तैनाती की जाएगी। अनुसंधान से लेकर अपराधियों की गिरफ्तारी का बोझ कम करने के लिए ऐसा किया जाएगा। बिहार पुलिस के जवान हर माह रिटायर हो रहे हैं और भर्ती नहीं होने से लगातार काम का बोझ बढ़ रहा है। बिहार पुलिस के मुखिया की समीक्षा में सामने आई खामी को दूर करने के लिए संविदा पर पुलिस कर्मियों की तैनाती की तैयारी है।
बिहार पुलिस का बोझ देखिए
पुलिस महानिदेशक एस के सिंघल ने समीक्षा के लिए अफसरों को नामित किया था। समीक्षा में पुलिस के बोझ और कार्यों में मनमानी की बात सामने आई है। पुलिस महानिदेशक को अफसरों ने बताया कि जिलों और थानों में दर्ज मामलों के अनुसंधान का काम अनुसंधानकर्ताओं के बीच संतुलित रूप से नहीं बांटा जा रहा है। काम के बंटवारे में मनमानी दिख रही है। इससे पारदर्शिता का बड़ा अभाव है। कुछ अनुसंधानकर्ताओं को अधिक तो कुछ कम मामले दिए जा रहे हैं। इसका बड़ा असर कांडों के निस्तारण पर पड़ रहा है। अफसरों ने बताया कि अपराध नियंत्रण, न्याय प्रणाली के विभिन्न अंगों के मध्य समन्वय का अभाव होने से भी कांडों के निस्तारण पर असर पड़ रहा है। अभियोजन पदाधिकारी और अनुसंधानकर्ता के बीच समन्वय नहीं बन पा रहा है। इससे कांडों के निस्तारण और अपराधियों पर नकेल कसने में बाधा आ रही है।
DGP का यह है प्लान
पुलिस महानिदेशक एस के सिंघल का कहना है कि कांडो का नियमित और समय से मॉनिटरिंग जरूरी है। राज्य में अनुसंधानकर्ताओं की कमी है। कुछ तकनीकी समस्या के कारण प्रमोशन भी नहीं हो पा रहा है। पदाधिकारियों की कमी यह बड़ा कारण है। सिपाही से प्रोन्नति के बाद ही दारोगा पद की रिक्ति भरी जाती है तथा पुलिस अवर निरीक्षक में 50 प्रतिशत पद प्रोन्नति से भरे जाते हैं। हर माह राज्य में पदाधिकारी रिटायर हो रहे हैं। पुलिस महानिदेशक बिहार के द्वारा राज्य में अनुसंधानकर्ताओं की कमी के दृष्टिकोण से पदाधिकारियों की संख्या बढ़ाए जाने के लिए संविदा पर नियुक्ति में तेजी लाने को कहा है। इसके साथ ही अनुसंधान के कार्यों की तकनीकी बाधाओं को दूर कर कांडों का निष्पादन किए जाने का भी आदेश दिया गया है।
अपराधियों की गिरफ्तारी बड़ी चुनौती
डीजीपी एस के सिंघल का कहना है कि बिहार पुलिस निर्धारित कार्य योजना के तहत अभियुक्तों की गिरफ्तारी की संख्या बढ़ाया जाना चाहिए। अपराधियों की गिरफ्तारी से अराजक और अपराधी प्रकृति के लोगों पर दबाव बनेगा। इससे पुलिस का मनोबल बढ़ेगा और अपराधियों का हौसला पस्त होगा। डीजीपी ने गंभीर मामलों में गिरफ्तारी के लिए तैयार किए गए वज्र की सराहना की और कहा गिरफ्तारी जरूरी है। अभियुक्तों की गिरफ्तारी को लेकर जिलों को निर्देश दिया गया है। राज्य स्तर पर गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाने पर भी विशेष जोर दिया गया है।
पुलिस के पास बरामद सामान रखने की जगह नहीं
पुलिस अधिकारियों की समीक्षा में पाया गया कि थानों के मालखानों में बरामद सामानों को रखने के लिए जगह ही नहीं है। पुलिस महानिदेशक को जो जानकारी दी गई, उसके मुताबिक थानों में मालखाना के लिए पर्याप्त कमरे और स्थल एलॉट नहीं है। जबकि इसके अनुपात में जब्त सामानों की संख्या अधिक है। डीजीपी ने निर्देश दिया है कि संसाधनों में ही वर्तमान में मालखाना के सामानों को सुरक्षित रखा जाए। भविष्य में बनने वाले थाना के भवनों में मालखाना के लिए पर्याप्त व्यवस्था बनाया जा रहा है। इसके साथ ही जमीन के विवाद में पुलिस को गंभीरता से काम करने को कहा गया है।







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