दरभंगा मनीगाछी प्रखंड के नेहरा में स्थापित पशु अस्पताल पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ नागेंद्र झा की पहल पर 1980 में नेहरा गांव में पशु चिकित्सालय की स्थापना की गई थी। एक चिकित्सक एवं दो चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की पदस्थापना की गई। वर्तमान में मात्र एक चिकित्सक ही यहां पदस्थापित हैं, चतुर्थ वर्गीय की दोनों पद रिक्त हैं। पशुपालन विभाग ने यहां की स्थिति सुधारने के लिए वर्ष 2008 में 84 लाख की लागत से आवासीय अस्पताल भवन के निर्माण के लिए टेंडर निकाला 2017 में निर्माण पूरा हुआ। इसके बाद अब तक नए भवन में पशु चिकित्सालय नहीं किया जा सका है।
भवन में सूअरों का बाड़ा बना हुआ है ।पूरे परिसर पर अवैध कब्जा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि इस भवन में बहुत सारे कीमती सामान की चोरी हो चुकी है। लेकिन इस पर पशुपालन विभाग का कोई ध्यान नहीं है। लोगों का कहना है कि यदि पशुपालन विभाग इस भवन का उपयोग नहीं कर पा रही है तो इसे किसी और विभाग के हवाले कर दे।ताकि बगल में अवस्थित जर्जर प्राकृतिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पशु चिकित्सालय भवन में चल सके और इसका सदुपयोग भी हो सके।

मौजूद पशु चिकित्सक डॉक्टर शिव कुमार से बात करने पर उन्होंने बताया कि अभी वह भवन हमारे बिभाग को नहीं सौंपा गया है ।यहां बैठने का जगह नहीं है। किसी तरह से हम आम जनता को सेवा दे पा रहे हैं ।दिक्कत तो बहुत सारी है ।आसपास के व्यक्ति मवेशी को लेकर आते हैं। और दवा भी ले जाते हैं ।जो दूर के हैं वह फोन पर ही संपर्क करते है। हम खुद उनके घर पर जाकर डोर टू डोर मवेशियों का इलाज करते हैं। समुचित व्यवस्था की बहुत ही कमी है हम भी अपने स्तर से अपने विभाग से बात की उन्होंने बताया कि भवन बना तो सही लेकिन अभी भी हमें हैंड ओवर नहीं किया गया है। पता नहीं वह भवन पशु अस्पताल के लिए बना था ,या सूअरों का बड़ा के लिए।







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