कुव्यवस्था ऐसी कि एसकेएमसीएच में मानवता शर्मसार हाे जाए। पाेस्टमार्टम हाउस में फैली दुर्गंध के बीच नाक पर रूमाल रखकर 13 दिनाें से पड़े अपने चचेरे भाई के शव की शिनाख्त करने पहुंचे दरभंगा के सिमरी निवासी विश्वजीत सिंह की हिम्मत जवाब दे गई। फ्रीजर के बजाय खुले में रखा शव सड़-गल गया था। एसकेएमसीएच पुलिस की ओर से तस्वीर न दिखाई गई हाेती ताे 36 वर्षीय भाई सुजीत सिंह के शव काे वह नहीं पहचान पाता।
वहां सुजीत जैसे छह और लावारिस शव पड़े हुए हैं। अंत्येष्टि के लिए परिजनों को सिर्फ हड्डियों के टुकड़े मिले। परिजनाें ने इसकी शिनाख्त पुलिस द्वारा माैत के बाद ली गई तस्वीर से की। मृतक सुजीत सिंह (36 वर्ष) दरभंगा के सिमरी थाने के भराठी गांव के सुशील सिंह का पुत्र था। 6 मई को अहियापुर थाने की पुलिस ने अस्पताल की इमरजेंसी से उठवाकर डेड बॉडी को पोस्टमार्टम हाउस में रखवाया था।
नियमत पहचान नहीं हाेने पर पुलिस काे 72 घंटे बाद डेड बाॅडी की अंत्येष्टि कर देनी है। इसके लिए एसकेएमसीएच की रोगी कल्याण समिति दो हजार रुपए भी देती है। लेकिन, सुजीत का शव 13 दिनाें तक बिना डीप फ्रीजर के पड़े रहने के कारण पूरी तरह गल गया था।


एसकेएमसीएच में शव सुरक्षित रखने काे लेकर हैं 3 डीप फ्रीजर, पर सभी खराब; अब भी पड़े हैं आधा दर्जन शव

शव सुरक्षित रखने के लिए यहां पर 3 डीप फ्रीजर लगे हैं, पर लंबे समय से एक भी काम नहीं कर रहा है। पोस्टमार्टम हाउस के इंचार्ज डॉ. विपिन कुमार ने बताया कि 3 डीप फ्रीजर मिले थे। उनमें से एक रखा-रखा खराब हाे गया। दूसरा लगते ही खराब हाे गया। जबकि, बीते मार्च में एक मिला है वह कूलिंग नहीं कर रही। इसके लिए कई बार प्राचार्य से शिकायत की गई, लेकिन फ्रीजर नहीं बनवाया जा रहा है। एेसे में लावारिस डेड बॉडी को डीप-फ्रीजर में नहीं रखा जा रहा। 2016 में 16 लाख रुपए से खरीदा गया फ्रीजर भी बिना उपयोग के ही खराब हो गया।
ये अज्ञात शव पड़े हैं पाेस्टमार्टम के लिए
- 02 मई काे एसकेएमसीएच इमरजेंसी वार्ड में इलाज के दाैरान मृत अधेड़ का शव
- 26 अप्रैल काे चंदन बखरी गांव के पास हत्या कर फेंका मिला युवक का शव
- 26 अप्रैल को एसकेएमसीएच के इंडोर वार्ड 4 में मृत अज्ञात अधेड़ का शव
- 26 मार्च काे अहियापुर के दादर में पेड़ से लटकी मिली महिला की डेड बॉडी
- 18 फरवरी काे दादर के समीप गंडक नदी के पास मिला एक युवक का शव
शवों की अंत्येष्टि को होता है पत्राचार
‘शिनाख्त नहीं होने तक लावारिस डेड बॉडी पुराने पोस्टमार्टम हाउस में रखी जाती हैं। उन्हें 72 घंटे तक सुरक्षित रखने के लिए पुलिस पत्राचार करती है। लेकिन, अधिकतर शव की पुलिस 72 घंटे में न ताे शिनाख्त कराती है, न ही उनकी अंत्येष्टि करती है। इसके लिए कई बार पत्राचार किया जाता है। अभी पड़े शवाें काे लेकर भी पुलिस से पत्राचार किया गया है, लेकिन अंत्येष्टि नहीं कराई जा रही है।’

-डॉ. विपिन कुमार, विभागाध्यक्ष, एफएमटी



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