सात निश्चय योजना के तहत जिले के नल जल योजना के दावा व हकीकत में जमीन आसमान का अंतर है। सरकारी दावा के अनुसार, जिले के 4579 वार्डाें में 99 फीसदी इस याेजना से काम पूरा हाे चुका है और लाेगाें काे शुद्ध पानी भी मिल रहा है। लेकिन, हकीकत में 36.34 फीसदी याेजना धरातल पर बंद पड़ी हुई है। तहकीकात के दाैरान बंद पाई गई 1671 याेजनाओं के करीब 4.17 लाख लाभुकों से प्रत्येक वर्ष 15 कराेड़ रुपए बिना पानी पिलाए ही वसूली की प्रशासनिक तैयारी जारी है।
सरकारी रिकॉर्ड में जिले के चयनित 4597 वार्ड के केवल एक फीसदी योजना ही अभी निर्माणाधीन है,बाकी के 99 फीसदी याेजनाओं से ग्रामीण पानी पी रहे हैं। लेकिन, जब दैनिक भास्कर की टीम ने प्रखंडवार ग्राउंड पर जाकर इसकी हकीकत जानी ताे चालू बताए जा रहे याेजनाओं की स्थिति काफी खराब पाई गई। उदाहरण के तौर पर गायघाट प्रखंड के कुल 320 वार्डाें में 261 वार्डाें के पंचायत क्रियान्वयन समिति ने अबतक पानी टंकी का निर्माण नहीं कराया है।
इस प्रखंड में 87 फीसदी नल जल योजना अभी बंद है। इसका कारण- कहीं मोटर खराब हाेना ताे कहीं टंकी ठीक से सेटिंग नहीं हाेना बताया गया है। साथ ही अधिकांश जगह पाइपलाइन खराब है और कई स्थान पर बिछी ही नहीं है।
मुशहरी के 20% वार्डों में कहीं मोटर जले, कहीं बिजली ही नहीं
मुशहरी के विभिन्न वार्डों की तहकीकात पता चला कि लगभग 20% वार्ड में योजना खस्ताहाल है। कहीं मोटर जले पड़े हैं, तो कहीं बिजली कनेक्श ही नहीं है। कुछ जगहों पर विभाग ने बिल जमा नहीं किया। इसलिए बिजली कनेक्शन काट दिया गया। 15 प्रतिशत वार्ड में राशि या भूमि नहीं मिलने के कारण अब तक नल जल योजना का काम शुरू ही नहीं हुआ। कई जगहों पर राशि की कमी के कारण अधूरा है।
औराई में 70 प्रतिशत वार्ड के लोग जलापूर्ति से वंचित हैं। साहेबगंज के 245 वार्डों में से 238 वार्डों में योजना पूरी हो चुकी है। 7 वार्डों में काम अधूरा है। प्रखंड के विभिन्न वार्डों के आंकड़े सरकारी दावे से अलग मिले। इधर, पंचायती राज विभाग ने उपभोक्ताओं से जल्द शुल्क वसूल कर वार्ड क्रियान्वयन समिति के खाते में जमा कराने काे कहा है।
नल जल के मेंटनेंस से बिजली बिल चुकाने तक की दुहाई दी गई है। वैसे अब तक राशि वसूली शून्य है। बिल नहीं चुकाए जाने से बिजली विभाग द्वारा कनेक्शन काटा जा रहा है। उपभोक्ता इस महत्वाकांक्षी योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं। इन बंद याेजनाओं के उपभाेक्ताओं से भी सालाना 15 कराेड़ रुपए वसूली की तैयारी है।





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