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700-1200 रुपए किलो बिक रहा मछली का अचार, करोना काल में नहीं बिक रही थी मछलियां

आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है बगहा के एक छोटे से गांव के लोगों ने। करोना काल में जब मछलियां मरने लगी और कोई खरीदार नहीं मिला तो महिलाओं ने फिश पिकल का कारोबार शुरू किया। छोटे से गांव की छोटी सी पहल आज मिसाल बन रहा है। फिश पिकल’ नया था बिल्कुल पहली बार प्रयोग के तौर पर मझौवा की महिलाओं ने शुरू किया। लेकिन आज फिश पिकल से तकदीर बदलने लगी है। बिहार के साथ यूपी से मछली के आचार के लिए खूब ऑर्डर मिल रहे हैं। अब तो पैकिंग के लिए भी महिलाओं ने ऑनलाइन सामग्री मंगाकर अभियान को आगे बढ़ा रही हैं।

मछली का आचार।

मछली का आचार।

करोना काल में व्यवसाय मछली के अचार का हुआ शुभारंभ
व्यवस्थापक राम सिंह ने बताया कि कोरोना काल में मछली नहीं दिख रहा था। मछली पालन से नुकसान होने लगा। मछलियों का महिलाओं के द्वारा अचार बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। आज महिलाओं के द्वारा बनाए गए फिश पिकल का महीने में चार से पांच क्विंटल की खपत हो रही हैं। कोरोना काल में शुरू हुआ कारोबार अब उद्योग का रूप लेने की ओर है। घर मे महिलाओं द्वारा तैयार फिश पिकल रोजगार देने लगा है। 7 सौ से 12 सौ रुपये प्रति किलो मछली का आचार बेच कर समूह की महिलाएं मालामाल हो रही हैं।

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