वैशाली जिले के हाजीपुर सदर प्रखंड के दिघी कला पूर्वी निवासी एक किसान राम बाबू सिंह ने 15 कट्ठा जमीन में पॉली हाउस में 2400 खीरा का पौधा उगाया है, जो बीज रहित है। किसान रामबाबू सिंह के मुताबिक 15 कट्ठा जमीन में बीज रहित खीरा की खेती करने में लगभग 50 हजार की खर्चा आयी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत करीब 25 लाख की लागत से पॉली हाउस में खेती की जा रही है।
उन्होंने कहा कि सेंटर फॉर एक्सीलेंस ऑफ वेजिटेबल, चंडी,नालंदा जाकर खेती के विषय मे जानकारी ली उसी प्रेरणा से खेती की है। बीज रहित खीरा की खेती के लिए बीज को जनवरी से मार्च तक लगाया जा सकता है। पॉली हाउस में मात्र 40 से 45 दिन में बीज रहित खीरा तैयार हो जाता है।
पॉली हाउस में टपक सिंचाई के माध्यम से 10 से 15 मिनट में पूरे पॉली हाउस में सिंचाई हो जाती है। उन्होंने बताया कि पॉली हाउस में की जा रही खेती में कम मात्रा में खाद एवं कीटनाशक का उपयोग होता है। इसका लागत कम पड़ता है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन करीब 2 क्विंटल बीज रहित खीरा बिक्री हो रही है। खीरा वैशाली आसपास के इलाके के व्यापारी खरीदकर ले जाते है।




किसान रामबाबू सिंह का कहना है कि बीज रहित खीरा को बिना छीले हुए खाया जा सकता है। इस खीरे में बीज नहीं पाया जाता है। वहीं इस खीरा में कड़वापन नहीं होता है। इस खीरा में पानी अधिक मात्रा में पाया जाता है। वहीं विटामिन से भरपूर है। वहीं किसान रामबाबू सिंह का कहना है कि इस बीज रहित खीरा को सलाद का शौकीन लोग इसका ज्यादा उपयोग कर रहे हैं। वहीं इस बीज रहित खीरे की खूबियां को जानने के बाद खरीदकर सलाद के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। किसान रामबाबू सिंह का बेटा कुणाल सिंह कुशवाहा बीए की शिक्षा ग्रहण के बाद अपने वृद्ध पिता की खेती के प्रति जज्बा को देख पिता के कंधा से कंधा मिलाकर खेती में हाथ बटा रहे हैं।



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