तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव में एक बार फिर से ठन गई है। तेजप्रताप के सवाल पर तेजस्वी हमेशा कन्नी काट जाते हैं और तेजप्रताप यह कहकर कि वे तेजस्वी के कृष्ण हैं और उन्हें मुख्यमंत्री बनवा कर रहेंगे। इन दोनों के बीच अब कार्यकर्ता पिसने लगे हैं। पावर वॉर में कभी छात्र RJD से आकाश को हटाया जाता है और कभी रामराज रो-रोकर इस्तीफा देने पहुंच जाते हैं। RJD के अंदर की अनुशासनहीनता की चर्चा चारों तरफ है।
राबड़ी आवास में 3 बजकर 28 मिनट पर नंगा कर पीटा गया मुझे- राम राज यादव
अब तक दोनों तरफ के कार्यकर्ता आपस में भिड़ते थे। अब सीधे तेजप्रताप यादव पर आरोप लगा है। तेज एक बार फिर से चर्चा में हैं। उन्होंने कहा है कि ‘मैंने अपने पिता के नक्शे कदम पर चलने का काम किया। सभी कार्यकर्ताओं को सम्मान दिया। जल्द अपने पिता से मिलकर अपना इस्तीफा दूंगा।’ इससे पहले उन पर गंभीर आरोप लगाया है युवा राजद के महानगर उपाध्यक्ष राम राज यादव ने। उन्होंने कहा है कि इफ्तार पार्टी के दिन 22 अप्रैल को राबड़ी देवी के आवास 10 सर्कुलर रोड में उनको कमरे में ले जाकर नंगा कर पीटा गया।
राम राज ने कहा कि ए टू जेड की बात की जाती है और वाई को प्रताड़ित किया जाता है। तेजस्वी यादव को अपशब्द कहा गया। गोली मरवा देने की धमकी तक दी। यही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि हमसे बड़े-बड़े नेताओं के साथ यह घटना हुई है। सेवा के बदले मां-बहन की गाली, लात-जूते और नंगा करके पीटा गया 3 बज कर 28 मिनट पर। मैं तीन दिन तक रोता रहा। उन्होंने मुख्यमंत्री से जान की रक्षा की गुहार लगाई है। तेजप्रताप यादव पहले कई बार यू टर्न ले चुके हैं और जानते हैं कि राजनीति प्रेशर पॉलिटिक्स से चलती है। दूसरी तरफ वे अगर इस्तीफा दे देते हैं तो पार्टी का एक विधायक घटेगा पर उनके बयानों और आरोपों से पार्टी को नुकसान का काफी खतरा है। तेजस्वी की राजनीति भी प्रभावित हो सकती है।
अनिल सम्राट के साथ भी मारपीट!
बता दें कि इससे पहले इफ्तार पार्टी में भोजपुर से RJD के MLC पद के उम्मीदवार अनिल सम्राट के साथ मारपीट की खबर भी आई थी। अब सफाई देते हुए तेजप्रताप यादव ने तेजस्वी यादव के सबसे निकट रह रहे लोगों को निशाने पर लिया है और कहा है कि ‘प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह, विधान परिषद सदस्य सुनील सिंह, हरियाणवी सलाहकार संजय यादव के बहकावे पर मेरे अनुज राजद के राम राज को बहकाया गया है।’ बता दें कि ये वही अनिल सम्राट है जिन्होंने तेजसवी और राजश्री के पोस्टर पटना में कई जगह लगवाया था।
राजद MLC सौरभ की जांच कराने की मांग की थी
तेज प्रताप यादव ने 24 सीटों पर चुनाव परिणाम के बाद एमएलसी सौरभ कुमार के बारे में कहा कि जिसे दूध पिलाया वह फन दिखा रहा। उन्होंने सौरभ के खर्चे की जांच की मांग कर दी है। सवाल उठाया कि वो एमएलसी कैसे बने बताएं। केंद्र और राज्य सरकार से जांच कराने की मांग की। तेज प्रताप ने सौरभ की संपत्ति आदि की जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सौरभ कई गलत धंधों में शामिल हैं और उनके पास गलत तरीके से पैसा आ रहा है। 50 लाख के टॉयलेट बनवाने तक की बात कही।
अनुशासनहीनता का चरम !
एक तरफ राम राज का इस्तीफा और गंभीर आरोप है और दूसरी तरफ राजद के विधायक और लालू पुत्र द्वारा इस्तीफे की धमकी है। राजद के तमाम कार्यकर्ता चाहते हैं कि इस बार फैसला हो ही जाना चाहिए। लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव राष्ट्रीय जनता दल को कैसे चलाना चाहते हैं यह तय हो जाना चाहिए। इधऱ के दिनों में राजद के सोशल मीडिया टीम ने भी अपने मनबढ़ुपन का परिचय देते हुए जो मन में आया सोशल मीडिया पर लिखा है। इसकी खूब आलोचना हुई। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर हुई इफ्तार पार्टी कटघरे में है। लोग जंगलराज की चर्चा फिर से करने लगे हैं। दिनों बाद तेजस्वी के रणनीतिकार संजय यादव इफ्तार पार्टी में नजर आए हैं।
हिटलर कहे जाने पर जगदानंद सिंह सप्ताह पर ऑफिस नहीं आए थे
तेजप्रताप यादव ने ताजा आरोपों से पहले 26 मार्च को सोशल मीडिया पर लिखा था-‘ गले में तुलसी माला और दिल में पाप… ईश्वर के नाम का सहारा लेने वाले इन ढोंगियों को जल्द सजा मिलेगी। जल्द खुलासा कुछ इस कदर होगा कि नर्क भी नसीब ना होगा इनको।’ अभी पार्टी के अंदर चल रहे बवाल से पहले काफी बवाल तब हुआ था जब 8 अगस्त 2021 को राजद कार्यालय में आयोजित छात्र राजद के कार्यक्रम में तेजप्रताप यादव ने मंच से जगदानंद सिंह को हिटलर कहा दिया था। उसके बाद जगदानंद सिंह सप्ताह भर पार्टी कार्यालय नहीं आए थे।
छात्र राजद के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष आकाश कुमार को पद से हटाया गया। बैनर पर लगे उसके फोटो पर कालिख पोती गई। तेजप्रताप यादव ने तब प्रेस कांफ्रेस कर राजद की नियमावली दिखाई थी और कोर्ट जाने की धमकी दी थी। उन्होंने लालू प्रसाद से जगदानंद सिंह को अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की। लेकिन न तो जगदानंद सिंह हटाए गए और न ही आकाश की वापसी हुई, संजय यादव भी बने हुए हैं। उसी समय तेजस्वी के रणनीतिकार संजय यादव पर भाई तेजस्वी यादव से नहीं मिलने देने का आरोप राबड़ी आवास से बाहर आकर तेजप्रताप ने लगाया था। हाल के दिनों कार्यालय सचिव चंद्रेश्वर प्रसाद को हटाए जाने पर भी तेजप्रताप ने जगदानंद सिंह की आलोचना की थी।
तारापुर में जनशक्ति परिषद से जुड़े संजय को उतार पार्टी को मुश्किल में डाल दिया था
इससे पहले तेजस्वी ने तारापुर और कुशेश्वर स्थान उपचुनाव में राजनीतिक रंग दिखाया था। छात्र जनशक्ति परिषद से जुड़े संजय यादव को तारापुर से उतारा गया था। बाद में रातों रात तेजस्वी यादव ने उन्हें मैदान से वापस करवाया। कुशेश्वर स्थान जाकर कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करने की बात से राजद पर प्रेशर बना था। 2011 के अक्टूबर में राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने कहा था कि तेजप्रताप तो पार्टी से खुद ही बाहर हो गए हैं क्योंकि उन्होंने अपना नया संगठन बना लिया है। तब जवाब में तेज ने कहा था किसी की हिम्मत उन्हें राजद से बाहर निकालने की नहीं है।
छात्र जनशक्ति परिषद के सुमंत ने इस्तीफा कर दिया था
2011 में ही तेजप्रताप यादव ने अपना नया संगठन छात्र जनशक्ति परिषद बना लिया था। संगठन के ब्राइक्रेट में लिखा था राजद और चिह्न हाथ में लालेटन को बनाया था। लेकिन लालू प्रसाद के कहने पर दोनों को हटाना पड़ा। लालू प्रसाद की सलाह पर ही उन्होंने छात्र जनशक्ति परिषद का चिह्न बांसुरी रखा। इसी संगठन के बैनर तले गांधी मैदान से लेकर जेपी आवास तक पैदल मार्च भी किया। संगठन के कुछ कार्यक्रमों के बाद छात्र जनशक्ति परिषद के सुमंत ने इस्तीफा दे दिया था।
लालू प्रसाद को बंधन बनाने का आरोप परिवारवालों पर लगाया था
तेजप्रताप यादव ने तारापुर और कुशेश्वर स्थान उपचुनाव के समय ही यह आरोप लगाया था कि लालू प्रसाद को दिल्ली में बंधक बना लिया गया है और पटना आने नहीं दिया जा रहा है। इसके बाद लालू पटना आए और दोनों जगहों की चुनावी सभा में गए। दोनो सीटों पर हार ने बताया दिया कि लालू प्रसाद का चुनाव में जाना राजद को कितना महंगा पड़ गया। सवर्ण वोट एकाएक भाजपा की तरफ शिफ्ट हो गया।
कहा था -….तो दे दो केवल पांच ग्राम रखो अपनी धरती तमाम
22 अगस्त 2021 को तेजप्रताप ने दिनकर की रश्मिरथी की पंक्तियां सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। …तो दे दो केवल पांच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम’। तेजप्रताप यादव, तेजस्वी के रणनीतिकार संजय यादव की तुलना दुर्योधन कहकर संबोधित कर चुके हैं। तेज ने तब लिखा था- ‘जब नाश मनुज पर छाता है पहले विवेक मर जाता है।’ तेजप्रताप यादव राजनीति में प्रेशर पॉलिटिक्स का हुनर जानते हैं। यह उन्होंने लालू प्रसाद से सीखा है।



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