बिहार के सरकारी स्कूलों में कीड़े की दवा खाकर एक ही दिन में 66 बच्चों की हालत बिगड़ गई। पेट दर्द और उल्टी दस्त की समस्या के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। एक साथ एक ही दिन 5 जिलों में हुई इस घटना ने सिस्टम पर सवाल किया। भागलपुर, मुंगेर, बेगूसराय और सीवान में हुई इस घटना को लेकर जब दैनिक भास्कर ने पड़ताल की 5 बड़े कारण आए। एक्सपर्ट के पैनल ने बताया कि साइड इफेक्ट का कारण
देश में चल रहा अभियान
बिहार के साथ पूरे देश में 22 अप्रैल को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाता है। इस खास दिन में एक से 19 साल तक के बच्चों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अल्बेंडाजोल की मुफ्त खुराक दी जाती है। इसके लिए स्कूलों के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों को चुना जाता है। बिहार में भी स्वास्थ्य विभाग कृमि नियंत्रण की दवाई अल्बेंडाजोल एक से 19 साल तक के बच्चों व किशोरों को स्कूलों एंव आंगनबाड़ी केंद्रों पर निर्धारित खुराक के अनुसार नि:शुल्क दवा खिलाई गई। दवा खाने के बाद बिहार के भागलपुर, मंगुेर, बेगूसराय और सीवान में लगभग 66 से अधिक बच्चे बीमार हो गए।
साइड इफेक्ट के 5 कारण
- वर्म के टूटने के बाद पेट में टॉक्सिन का बनना
- खुराक लेने वाले को गैस्ट्रोएंटेराइटिस की समस्या
- परिवार में किसी को कोरोना का लक्षण होना
- बुखार या फिर पेट में पहले से कोई समस्या या डोज का अंतर
- खाली पेट अल्बेंडाजोल की खुराक लेना
एक्सपर्ट ने टॉक्सिन को बताया बड़ा कारण
पटना के न्यू गार्डिनर रोड सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट डॉ मनोज कुमार का कहना है कि अल्बेंडाजोल से कोई बड़ा साइड इफेक्ट नहीं होता है। बच्चा जब अल्बेंडाजोल खाता है, ताे पेट में मौजूद वार्म टूटते हैं। वार्म अधिक हों तो उनके टूटने की प्रक्रिया बहुत ज्यादा टॉक्सिन बनता है। टॉक्सिन के कारण बच्चों में उल्टी, दस्त और हल्के फीवर के साथ शरीर में इचिंग की समस्या होती है। डॉ मनोज कुमार के मुताबिक अल्बेंडाजोल ऐसे लोगों को पर भी साइड इफेक्ट दिखाती है जो गैस्ट्रोएंटेराइटिस की समस्या से परेशान होते हैंं, या फिर पेट की कोई समस्या होती है। हालांकि इसका साइड इफेक्ट सामान्य के साथ थोड़ी देर के लिए होता है।
कोविड की गाइडलाइन
बिहार सरकार की तरफ से आदेश दिया गया था कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक जो COVID – 19 पॉजिटिव हैं और सक्रिय COVID – 19 वाले घरों के बच्चे राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम की में शामिल नहीं होंगे। सरकार के आदेश के मुताबिक ऐसे बच्चों को कीड़े की दवा नहीं लेनी है। हालांकि गोपालगंज, मंगुेर, बेगूसराय और सीवान में कोरोना को लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई। इस कारण से इसे लेकर कोई कारण नहीं माना जा रहा है। संबंधित जिलों में शिक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में भी कोविड को लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है।
खाली पेट अल्बेंडाजोल की खुराक नहीं
गैस्ट्रो सर्जन डॉ संजीव कुमार का कहना है कि अल्बेंडाजोल को खाली पेट नहीं दिया जाता है। डॉक्टर इसे रात में ही सोते समय खाने की सलाह देते हैं। उम्र और वजन के हिसाब से ही खुराक का भी निर्धारण होता है। अगर डोज में मानक पूरा नहीं हुआ तो समस्या हो सकती है। खाली पेट दवा लेने से गैस बनने के साथ उल्टी दस्त की समस्या हो सकती है। गर्दनीबाग हॉस्पिटल की डॉ राज कुमारी बताती हैं कि अल्बेंडाजोल के साइड इफेक्ट कॉमन होते हैं। इसमें थोड़ी सावधानी बरती जाए तो कोई इफेक्ट नहीं होता। वार्म के टूटने पर ऑक्सिन बनता है, जिससे गैस की समस्या होती है। खाली पेट नहीं लेना होता है, खुराक पर ध्यान देना होता है। साइड इफेक्ट दिखता भी है तो थोड़ी देर के लिए होता है।
दवा खाने से कहां कितने बीमार
भागलपुर – 24
मुंगेर – 30
बेगूसराय – 5
सीवान – 7



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