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बिहार के इस गाँव में चचरी पुल के सहारे 5 हजार की आबादी

प्रशासन के लोग नालंदा के हर गांव तक सड़क बनाने के दावे करते हैं। लेकिन, सच्चाई यह नहीं है। अस्थावां प्रखंड के रजावां और डेढ़धारा दो ऐसे गांव हैं, जहां निवास करने वाली 5 हजार की आबादी अब भी बांस के बने चचरी पुल के सहारे आवाजाही करती है। पुल भी प्रशासन द्वारा नहीं बनाया गया है। ग्रामीणों ने चंदा कर खुद बनाया है। नित्य दिन जान हथेली पर लेकर पुल पार करते हैं।

रजवां गांव के एक किनारे से गोइठवा तो दूसरे किनारे से सिंघगवा नदियां गुजरी हैं। 15 साल पहले मनरेगा से सिंघगवा नदी पर छोटा सा पुल बनाया था। इससे ग्रामीणों को काफी राहत भी मिली थी। पुल को पार कर नदी के तटबंध से लोग पैदल और छोटे वाहनों से आते-जाते थे। दूरी कम रहने के कारण मुख्य मार्ग तक पहुंचने में समय भी कम लगता था। लेकिन, नदी की तेज धार में सितंबर 2021 को पुल टूट गया। दोनों गांव के लोग प्रखंड और जिला के हाकिमों से फरियाद लगायी। कोई नतीजा नहीं निकला तो आपस में चंदा किया और बांस का चचरी पुल बना दिया। इसी से आवाजाही करते हैं। लेकिन, अनहोनी का डर हमेशा डराते रहता है।

उबड़-खाबड़ रास्ते पर चल पहुंचते हैं एनएच 84 तक

मुखिया जीतेन्द्र कुमार, मनोज पांडेय, सुरेन्द्र प्रसाद व अन्य ग्रामीण कहते हैं कि दोनों गांव सीधे लिंक पथ से अबतक नहीं जुड़ा है। शेरपुर से होकर एक वैकल्पिक मार्ग है। लेकिन, दूरी बहुत है। एक किलोमीटर की जगह तीन किलोमीटर चलना पड़ता है। बांस का पुल ही सहारा बना हुआ है।उबड़-खाबड़ कच्चे रास्ते से पैदल चलकर मुख्य सड़क (एनएच 84) तक पहुंचते हैं तो जान में जान आती है।

बारिश की आहट से सिहर उठते हैं ग्रामीण

गांव के लोग कहते हैं कि नदी में पानी सूख गया है। जल्द पुल बनाने का काम शुरू नहीं हुआ तो बारिश का दिन आ जाएगा। फिर पुल बनाना संभव नहीं होगा। नदी की तेज धार चचरी पुल को भी बहा ले जाएगी। फिर तो रही-सही कसर भी पूरी हो जाएगी। मजधार में बड़ी आबादी फंस जाएगी। बारिश की आहट से यहां के लोग सिहर उठते हैं। डर यह कि नदी में पानी आएगा तो सारी उम्मीदे भी साथ ले जाएगा।

चचरी को पार कर बच्चे जाते हैं स्कूल

रजावां में मध्य विद्यालय हैं। आठवीं तक की पढ़ाई होती है। उसके बाद भी पढ़ाई के लिए दोनों गांवों के छात्रों को दो किलोमीटर दूर महम्मदपुर प्लस टू स्कूल जाना पड़ता है। लेकिन, वहां तक पहुंचे के लिए कोई सीधा मार्ग नहीं हैं। टेढ़े-मेढ़े रास्ते हैं भी तो दूरी अधिक है। लाचारी में बच्चे चचरी को पार कर स्कूल हर दिन जाते हैं

मनरेगा से पुल बनाने की तैयारी

मुखिया जितेन्द्र कुमार कहते हैं कि पुल के टूटे रहने से लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। वैसे मनरेगा से पुल बनाने की योजना बनायी गयी है। उम्मीद है कि जल्द ही प्राक्कलन बनाकर काम शुरू कर दिया जाएगा।

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