Breaking News

बिना हाथ के पंजों के दौड़ाते हैं बाइक,कभी हाद’से में क’ट गई थी दोनों कलाई, फिर भी हेड-राइटिंग कमाल की

हौसलों की उड़ान देखनी है तो सीवान के कलामुद्दीन को देखिए। कभी हादसे में अपना दोनों हाथ गंवा दी थी। फिर भी जज्बा कुछ कर गुजर की आस ने उनकी जिंदगी में नया रंग भर दिया। हाथ नहीं है पर हैंड राइटिंग गजब की है। जब वे बाइक चलाते हैं तो लोग देखने लगते हैं।

45 वर्षीय पुत्र मोहम्मद कलामुद्दीन सीवान जिले के पचरुखी प्रखंड के भरतपुरा गांव के रहने वाले हैं। कलामुद्दीन बताते हैं कि साल 1990 की दशक में एक हादसे के दौरान उन्होंने अपनी दोनों हाथ गंवा दी थी। बिना हाथ के उनका अपना जीवन दुर्लभ लगने लगा था। वह सोचने लगे थे कि मैं जीकर क्या करूंगा। जब उनका दोनों पंजा ही नहीं रहा। उनको जीवन यापन की चिंता सताने लगी थी। फिर उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपना धैर्य को बनाए रखा। बताते हैं कि 1991 में उन्होंने जयपुर के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल में कृत्रिम अंग बनवाया। किंतु कृत्रिम अंग सफल नहीं हुआ।

अपना धैर्य नहीं खोया

कलामुद्दीन ने कहा कि इन सब कठिनाइयों के बावजूद अपना धैर्य नहीं खोया। मैंने आत्मनिर्भरता के बल पर वह सारी कठिनाइयां झेलते हुए सामान्य व्यक्तियों की तरह जीने की कल्पना अपने दिलों में बैठाए रखा। अपने कटे हुए हाथों से वह सारी काम करना सिखा और आज इन्हीं कटे हुए हाथों से आम लोगों की तरह अपना काम बखूबी निर्वहन कर लेते है।

कट गई थी हाथों की दोनों कलाई फिर भी हेड राइटिंग

कलामुद्दीन बताते हैं कि उनके कलाई कट गई है फिर भी वह अपने कलाई के सहारे वह सारी चीज लिख पढ़ लेते हैं जो आम इंसान अपने जीवन में करता है। इसके अलावा वह एंड्रॉयड फोन, मोटरसाइकिल,तथा किसान परिवार से होने के नाते खेतों में खड़ी गेहूं की फसल भी हंसिए से आसानी पूर्वक काट लेते हैं। दुनिया में सिर्फ एक ही विकलांगता है और वह है नकारात्मक सोच। इस बात को सच साबित कर न सिर्फ अपने लिए बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन रहे है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.