MUZAFFARPUR : भूमिहार ब्राह्मण समाजिक फ्रंट द्वारा बोचहां चुनाव परिणाम आने के बाद राजद प्रत्याशी अमर पासवान को फ्रंट की तरफ से जीत की बधाई दी । इसे लेकर खबरा स्थित रेणुका पैलेस में फ्रंट के सदस्यों द्वारा बैठक आयोजित कर समाज की एकजुटता के लिए जश्न भी मनाया गया।
इस मौके पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए फ्रंट के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री इंजीनियर अजीत कुमार ने कहा कि हमारे भूमिहार समाज के स्वाभिमान, सम्मान और अधिकार पर चोट पहुंचाया जाएगा, तो भूमिहार समाज एकजुट होकर इसका जवाब देंगा।
उन्होंने कहा कि हम लोगों का उद्देश्य किसी जाति विशेष का विरोध नहीं हैं। बल्कि हमारा उद्देश्य है कि समाज के सभी गरीब वर्ग के लोगों को हर संभव मदद करना। इसी उद्देश्य के तहत बोचहां में हमलोगों ने अमर पासवान की मदद की है।
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में सभी राजनीतिक पार्टियां हमारे समाज को लगातार दबाने की कोशिश कर रही थी। यही कारण है कि हमारा समाज एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए लड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमिहार ब्राह्मण समाजिक फ्रंट का किसी राजनीतिक पार्टी से कोई सरोकार नहीं है। इस चुनाव में हमें अपनी ताकत बतानी थी और इसके परिणाम स्वरूप हम लोगों ने राजद के उम्मीदवार अमर पासवान को भारी बहुमत से जीत दिलाने का काम किया।

उन्होंने भूमिहार समाज के सभी लोगों को बधाई दी और कहा कि सभी लोगों ने एकजुट होकर अपनी चट्टानी एकता को प्रदर्शित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी हमारे हित की बात करेगा। हम उसी के साथ रहेंगे और यह हमारे फ्रंट का सभी के लिए संदेश है।
इस अवसर पर धर्मवीर शुक्ला, अरुण कुमार सिंह, राजू ठाकुर, श्याम जी, रणधीर कुमार सिंह, शांतनु सत्यम तिवारी, अंकेश ओझा, दिव्यांशु सौरव, राजकुमार, कृष्णा, विकास पांडेय, पप्पू सिंह, मुन्ना शाही, भूषण ओझा, रंजन कुमार, गुलशन कुमार, कादंबिनी ठाकुर, चन्दन कुमार ओझा समेत बड़ी संख्या में फ्रंट के सदस्य उपस्थित थे।




हम सदैव दावा करते रहे एकजुटता का पर जरा अपने दिल पर हाथ रख कर बताऐ, क्या कभी अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के अलावा हमने जमात का सोचा है, नहीं कभी नहीं, वर्ना जल जमाव की समस्या लेकर विद्वान भुमिहारों ने श्री सुरेश शर्मा जी की पराजय का कारण न बनते, हालांकि जल जमाव की समस्या मोहल्ला और नये भवन निर्माण के साथ नये इलाकों में नाली और सड़क के लिए आवश्यकता अनुसार भूमि का न छोड़ा जाना हैं| अगर जमात की बात करते हैं तो आंखों को बन्द कर नेता के पिछे चलना होता हैं ताकि उसकी साख बनी रहे नहीं तो वह बेचारा न घर का रहता है न घाट का| अन्य जमात में देखिये मिला या न मिला भीड़ हमेसा साथ चली| आत्म मंथन करें या