मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को तांगा कुछ ज्यादा ही पसंद है। जब भी सीएम राजगीर आते हैं तो तांगा की सवारी करना नहीं भूलते हैं। जिस तांगे पर बैठकर वे राजगीर की वादियों की सैर करते हैं उसका नाम राजधानी तांगा है। जिसे राजगीर के कैलाश आश्रम निवासी दिलीप यादव और उनके सहयोगी श्रवण कुमार चलाते हैं।
12 अप्रैल को मुख्यमंत्री जन संवाद यात्रा के क्रम में राजगीर विधानसभा में जदयू के कार्यकर्ता और पुराने साथियों से मुलाकात करने आए थे। उस दिन भी मुख्यमंत्री ने इसी तांगे की सवारी की थी और राजगीर की गलियों में घूम-घूम कर कार्यकर्ताओं से मुलाकात की थी।

तांगा पर सवार CM नीतीश।
2004 से मुख्यमंत्री राजधानी तांगे की कर रहे हैं सवारी
राजधानी तांगे के मालिक दिलीप यादव बताते हैं कि जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री भी नहीं बने थे, तभी से इस तांगे की सवारी कर रहे हैं। तभी से उन्होंने अपने तांगे में नीतीश जी की सवारी लिख रखा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद जब भी नीतीश कुमार राजगीर आए, तब राजधानी तांगे पर ही बैठकर घोड़ाकटोरा, सोनभंडार समेत अन्य भ्रमणीय स्थलों तक गए। 2004 से 2014 तक लगातार वे टमटम की सवारी करते रहे। उसके बाद इस बार फिर से उन्होंने टमटम पर बैठने की इच्छा जताई और राजगीर में अपने कार्यकर्ताओं से मिले।

दूर-दूर से आने वाले सैलानी उनके टमटम पर बैठने की इच्छा प्रकट करते हैं।
घोड़ी का नाम रानी
दिलीप यादव बताते हैं कि मुख्यमंत्री के द्वारा उनके टमटम पर सवारी किए जाने के बाद उन्हें इसका काफी फायदा मिला है। दूर-दूर से आने वाले सैलानी उनके टमटम पर बैठने की इच्छा प्रकट करते हैं। जिन्हें वे काफी सहूलियत के साथ राजगीर का भ्रमण कराते हैं। जिस तांगे की सवारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करते हैं उसे रानी नाम की घोड़ी खींचती है। दिलीप यादव बताते हैं कि इस बार जब मुख्यमंत्री ने उनकी टमटम की सवारी की तो उनका हालचाल पूछा। जिसके जबाब में उन्होंने सब ठीक है कहा।
सैलानी भी तांगा की सवारी करना नहीं भूलते
बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब भी राजगीर आते हैं तो वे तांगा की सवारी करना नहीं भूलते हैं। हालांकि, उन्होंने घोड़ाकटोरा तक जाने के लिए भी पर्यटकों के लिए तांगा की ही व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा कराई है। राजगीर घूमने आने वाले सैलानी भी तांगा की सवारी करना नहीं भूलते हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री भी इसकी सवारी का आनंद उठाते हैं।



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