झारखंड के देवघर के त्रिकुट पहाड़ी पर हुए रोप-वे हादसे में बचकर आए लोग अब भी खौफ में हैं। 2500 फीट की ऊंचाई पर क्या हालात बन गए थे, यह सुनकर अब लोगों के रोंगटे खड़े हो जा रहे हैं। ऐसे ही एक पर्यटक विनय दास ने बताया, ‘हमारे ट्रॉली पर 4 लोग फंसे थे। हम लोग 24 घंटे तक ऊपर झूलते रहे। तीखी धूप और पानी नहीं पहुंचने के कारण हालात बिगड़ने लगे थे। सबने इमरजेंसी के लिए अपने-अपने यूरिन को बोतल में जमा कर लिया था। और ज्यादा लेट होता तो सबको यह पीना पड़ता।
बता दें, विनय को सेना ने सोमवार शाम को रेस्क्यू कर निकाल लिया था। उन्होंने यह बातें मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए बताई है। जबकि, प्रशासन फंसे पर्यटकों तक पानी और खाने का पैकेट पहुंचाने का दावा कर रहा है।
मुंडन कराने आए थे, नहीं पता था ये होगा : सीया देवी
मुजफ्फरपुर की निवासी सीया देवी ने कहा, ‘लगा था कि जान बचनी मुश्किल है। परिवार के 8 लोग फंसे हुए थे। 24 घंटे बाद निकल पाईं। वहीं परिवार के अन्य लोग मंगलवार सुबह 36 घंटे बाद निकले। बच्चों का बुरा हाल था। खिलाने के लिए कुछ पास नहीं था। नाती का मुंडन कराने हम देवघर गए थे। वहीं से त्रिकुट पहाड़ी घूमने का प्लान बना। सभी लोग पूजा कर रोप-वे से दो ट्रॉली में निकले। अचानक रस्सी टूटी तो लगा कि अब जान नहीं बचेगी। जवान देवदूत बनकर आए और हमें बचा ले आए।’
उम्मीद नहीं थी जान बच पाएगी : सुधीर कुमार
अस्पताल में भर्ती पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर निवासी सुधीर कुमार दत्तो ने बताया कि उम्मीद नहीं थी कि जान बच पाएगी। ट्रॉली में बीता एक-एक पल एक-एक दिन के बराबर लग रहा था। 36 घंटे बाद जवान ने बचाई जान। दामाद भी साथ में थे। बहुत डर लग रहा था कि क्या होगा। बस भगवान का शुक्रिया की जान बच गई।
ट्रॉली का शीशा टूटकर पत्नी के चेहरे में लगा : भूपेन बर्मन
असम के भूपेन बर्मन ने भी डर के उस पल को भास्कर से साझा किया। वह दुमका कैंप में SSB जवान हैं। पत्नी संग देवघर घूमने के लिए गए थे। इस दौरान वे त्रिकुट पहाड़ घूमने के लिए भी गए। पत्नी दीप्ति बर्मन 3 महीने की गर्भवती हैं। उन्होंने बताया कि अचानक से चलते चलते रोप-वे की रस्सी टूट गई। ऐसा लगा अब नहीं बचेंगे। तभी ट्रॉली जाकर दूसरी ट्रॉली से टकरा गई। इतना तेज झटका लगा कि हमारी ट्रॉली का शीशा टूट गए। पत्नी गेट के बगल में बैठी थी। शीशा टूटकर लगने से उनके दो दांत टूट गए। चेहरे पर भी गंभीर चोट लगी है। किसी तरह अन्य लोगों के सहारे पत्नी को नीचे भेजा। फिर खुद कूद गया।
रविवार शाम को हुआ था हादसा
त्रिकुट पर्वत पर रोप-वे पर रविवार शाम 4 बजे हादसा हो गया। हादसे के 45 घंटे बाद रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो गया। रोप-वे की ट्रॉलियों में फंसे 48 लोगों में से 46 को बचा लिया गया है। हादसे में कुल 4 लोगों की मौत हुई है और 12 से ज्यादा घायल हैं। रेस्क्यू के दौरान दूसरे दिन भी एक महिला ट्रॉली से गिर गई। उसकी मौत हो गई। सोमवार को भी एक युवक की हेलिकॉप्टर में चढ़ाने के दौरान गिरने से जान चली गई थी।



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