नवरात्र के 9 दिन खास है। इसमें भारत के 52 शक्तिपीठों में से एक सिद्ध शक्तिपीठ मां चंडीका स्थान में भक्तों का सैलाब उमड़ती है। चैती दुर्गा के नवरात्र में प्रथम पूजा से ही सुबह 4:00 बजे से सैकड़ों नर-नारी हाथों में जल पुष्प लेकर मां के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंच जाते हैं ।कहते है माता के दरबार मे यहां जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से मुरादे मांगते है मां सभी भक्तों की मुरादें पूरी करती।
क्यों है खास चंडिका स्थान
भारत के 52 शक्तिपीठों में से एक मुंगेर का सिद्ध शक्ति पीठ चंडी स्थान है। यहां सति के बांयी नेत्र की पूजा होती है।इस संबंध में चंडिका स्थान के प्रधान पुजारी नंदन बाबा ने बताया कि सति के के पति भगवान भोलेनाथ ने क्रोध में सति के शव को कंधे पर लेकर तांडव करने लगे तब सृष्टि को विनाश से रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से शव को खंडित कर दिया। शव के 52 टुकड़े हुए ।52 टुकड़े अलग-अलग स्थानों पर गिरा।सती के अंग जहां-जहां गिरे वहां सिद्ध शक्तिपीठ बना।मुंगेर जिले के वासुदेव पुर पास मां सती का बांया नेत्र गिरा था। इसलिए इस शक्तिपीठ में मां की बांयी नेत्र की पूजा होती है।

9 दिन है खास
नवरात्र के 9 दिन चंडिका स्थान में विशेष पूजा होती है। मंदिर की सभी व्यवस्थाएं स्थानीय पंडा समाज एवं धार्मिक न्यास समिति के सदस्य करते हैं ।इस संबंध में चंडिका स्थान धार्मिक न्यास समिति के सचिव सागर यादव ने कहा कि नवरात्र में यहां विशेष पूजा की जाती है। भक्तों का जनसैलाब इस मंदिर में उमड़ता है अष्टमी पूजा को विशेष पूजा की जाती है तथा नवमी हवन का कार्यक्रम होता है। जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। हवन के बाद ही श्रद्धालु व्रत समाप्त कर नमक ग्रहण करते है।



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