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गंगा दियारा में दिखा अमेरिकी पेरेग्राइन फाल्कन

पिछले दिनों हुए एशियन वाटर बर्ड सेंचुरी सर्वे में बुलेट ट्रेन की रफ्तार से भी तेज उड़ने वाला पेरेग्राइन फाल्कन (शाहीन बाज) देखा गया। यह बुद्धूचक (कहलगांव) के पास विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन के दियारा पर दिखा। सर्वे टीम ने इसे कैमरे में कैद कर लिया। वन पदाधिकारी भरत चिंतापल्ली का कहना है कि पेरेग्राइन फाल्कन पक्षी 320 किलोमीटर प्रति घंटे से भी अधिक रफ्तार से उड़ सकता है। इसके उड़ान की अधिकतम गति 450 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है। यह मांसाहारी है।

कुछ बरसों से यह सुरक्षित स्थान और भोजन की तलाश में विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन में पहुंच रहा है। यह 2-4 जोड़े के साथ दिखता है। यह हवा में ही दूसरे पक्षियों को अपना शिकार बना अपना पेट भरता है। चिंतापल्ली के अनुसार, एशियन वाटर बर्ड सेंचुरी सर्वे 16 फरवरी शुरू हुआ था। 20 को समाप्त हुआ। यह सर्वे पर्यावरण एवं वन विभाग बिहार सरकार, मुंबई नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी, और बिहार वेटलैंड ने किया था। जिले में विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन के अलावा यह सर्वे जगतपुर झील, बाहात्रा झील, गंगा प्रसाद और दियारा झील में किया गया।

लंबे पंख उड़ने में करते हैं मदद
दीपक ने बताया, पेरेग्राइन फाल्कन के शरीर की लंबाई 13 से 23 इंच और पंख की लंबाई 29 से 47 इंच तक होती है। इसकी छाती मजबूत मांसपेशियों, लंबे पंख, स्ट्रीमलाइनर के कारण इसे तेज रफ्तार में उड़ने में मदद देते हैं। इसकी नाक पर ट्यूबर सेल्स होता है, इससे यह तेज रफ्तार में भी सांस ले सकता है। यह मूलतः उत्तरी अमेरिकी पक्षी है।

अब लौट जाएंगे प्रवासी पक्षी
बिहार सरकार का भागलपुर में प्रस्तावित पक्षी महोत्सव 2022 कोरोना के कारण नहीं हो पाया। अब गर्मी आते ही अब प्रवासी पक्षी अपने मूल क्षेत्र की ओर लौटने लगेंगे। वन पदाधिकारी भरत चिंतापल्ली ने बताया, कोरोनाकाल में सरकार ने आयोजन पर पाबंदी लगाई थी। विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन क्षेत्र के अलावा जिले में लगभग 100 तरह से अधिक प्रवासी पक्षियों का समागम नवंबर से मार्च तक लगता है।

हवा में धारदार नाखून वाले पंजे से पकड़ता है अपना शिकार

भारतीय वन्यजीव संस्थान के गंगा प्रहरी स्पियर हेड दीपक कुमार ने बताया, पेरेग्राइन फाल्कन को बोलचाल की भाषा में शाहीन बाज कहते हैं। यह अपने मजबूत धारदार नाखून एवं पंजों से शिकार को हवा में उड़ते ही पकड़ लेता है। शिकार के वक्त इसकी स्पीड 390 किलोमीटर प्रति घंटा से भी अधिक होती है।

विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन क्षेत्र और भागलपुर के आसपास का क्षेत्र नवंबर से मार्च के अंतिम तक पक्षियों के लिए अनुकूल होता है। इसलिए प्रवासी पक्षियों का समागम लगता है।

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